चतुर एवं चालक प्रेमी जोड़े ने शायद ये नहीं सोचा था कि वे इश्क में अंधे होकर जो निर्मम कृत्य कर रहे हैं एक दिन उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा देगा। थाना मोहना के गांव सिटावली की है।
बासठ वर्षीय जिले ने पुलिस को सूचना दी की कि उसकी 15/16 वर्षीय लड़की वैजयंती उर्फ बंटी प्रात: के समय गांव की ही एक लड़की सविता उर्फ काली के साथ रफा हाजत के लिए घर से बाहर गई थी।
काफी समय तक वैजयंती को तलाश किया लेकिन जब पूछताछ के लिए सविता उर्फ काली के घर पहुंचे तो काली की मौत हो चुकी थी और परिजनों को उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया था। जिले सिंह ने पुलिस को बताया कि उसकी लड़की को कोई युवक भगा ले गया है। पुलिस ने आपराधिक मामला दर्ज कर वैजयंती की तलाश शुरुकर दी।
पुलिस की तफ्तीश
वैजयंती उर्फ बंटी अंतिम बार सविता उर्फ काली के साथ घर से बाहर आई थी लेकिन पुलिस काली से पूछताछ नहीं कर सकती थी कि क्योंकि उसकी तो मौत हो चुकी थी। पुलिस ने सविता उर्फ काली की मां राजवंती से पूछताछ की तो उसने बताया कि 9/10 वर्ष पूर्व उसके पति ओमबीर की मौत हो चुकी है। उसकी चार लड़कियां व एक लड़का है। सविता उर्फ काली की शादी 7/8 वर्ष पूर्व गांव जागसी के वृजेंद्र से हुई थी लेकिन डेढ़ साल से वह मायके में ही रह रही थी।
पड़ा संदेह का बीज
सविता उर्फ काली की मां के मुताबिक सविता की मौत बिजली के करंट से हुई थी। उसका शरीर व चेहरा जला हुआ था सिर्फ पैरो में पहनी चुटकियों के आधार पर पहचानकर उसका अंतिम संस्कार पुलिस को बताए बगैर कर दिया। पुलिस को इस बात पर संदेह हुआ कि कहीं अपराधी इसी घर से संबंधित न हो।
तहकीकात में सामने आए तथ्य
पुलिस की तहकीकात रंग लाने लगी थी। जब ओमबीर के घर से धुंआ उठ रहा था तो एक नीरज नाम का लड़का ओमबीर के घर से निकल कर मकानों की छत से भागता हुआ देखा गया था। नीरज ने राजवंती नामक महिला के टोकने पर बताया कि पाहडी माहल उड़ रहा था इसलिए धुआं किया है। नीरज गांव भिगान का रहने वाला था। चूकि राजवंती का मायका लडसौली में था इसलिए नीरज उसे बुआ कहता था और अक्सर उसके घर आता जाता था। कई दिन उसके घर पर रह कर खेत के कार्यो में हाथ भी बंटाता था। घटना के बाद वह लापता था।
नीरज पर गहराया संदेह
वैजयंती उर्फ बंटी अंतिम बार सविता उर्फ काली के साथ देखी गई थी और सविता की मौत हो चुकी थी। लिहाजा जांच को आगे बढ़ाने के लिए नीरज की तलाश की गई। नीरज 2003 में भी गांव की एक लड़की को भगा ले गया था। उसके पिता ने उसे अपनी सम्पत्ति से बेदखल कर दिया था। वैजंती की पहनी हुई चप्पलें, रेशम की डोरी, हेयर क्लिप खेतों में पुलिस को मिली। पुलिस को संदेह हुआ कि कही वैजयंती की हत्या तो नहीं की गई? पुलिस नीरज की फोटो दूरदर्शन और अन्य समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए।
और रंग लाई मेहनत
महीनों की छानबीन रंग लाई। अनुसंधान में जुटे तत्कालीन मोहाना थाना प्रभारी उप निरीक्षक राजपाल सिंह लाकड़ा, सीआईए प्रभारी निरीक्षक यशपाल खटाना, एसआईटी टीम प्रभारी उप निरीक्षक कलंदर सिंह की टीम ने नीरज उर्फ गोरी व सविता उर्फ काली को खोज निकाला। सविता उर्फ काली को जिंदा देख एक बारगी पुलिस के भी होश उड़ गए।
सविता और नीरज ने कबूला अपराध
नीरज और सविता ने कबूला कि दोनों के बीच प्यार था। दोनों एक साथ जीवन बिताना चाहते थे। इस बीच वैजयंती उर्फ बंटी ने सहेली होने के कारण सविता के समक्ष कबूला था कि उसका भी एक युवक के साथ संबंध है, जिससे वह गर्भवती है। बेवफाई से आहत वैजयंती अपनी जान देना चाहती थी। इस जानकारी के बाद सविता और नीरज ने एक सनसनीखेज योजना बनाई। योजना के मुताबिक एक दिन सविता उर्फ काली ने वैजयंती को अपने घर से बुला कर पास के खेतों में ले गई।
जहां नीरज पहले से ही उपस्थित था। वैजयंती को बातों में उलझा कर उन्होंने उसके गले में रस्सी डाल कर उसकी हत्या कर दी। उसके शव को चारे की गठरी में बांध कर अपने घर ले आए। मिट्टी का तेल छिड़क कर उसमें आग लगा दी। वैजयंती उर्फ बंटी के गले में पहनी चांदी की चैन व अंगूठी भी उन्होंने उतार लिया। खुद के कपड़े और गहने सविता ने उसे पहना दिए। दोनों अमृतसर में एक किराए का कमरा लेकर रहने लगे।
दोनों को मिली जेल
पुलिस ने दोनों को रिमांड पर लेकर साक्ष्य जुटाए और भारतीय दण्ड संहिता की धारा 363, 366, 302, 201, 34 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर अदालत में पेश कर दिया। मामला अदालत में विचाराधीन है।
- राजीव दत्त पाण्डेय, सोनीपत