रेवाड़ी.
खेल कोटे से नौकरी न मिलने से आहत भीम अवार्डी बॉक्सर मीना कुमारी भीम अवार्ड लौटाएंगी। वल्र्ड वुमन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य और राष्ट्रीय खेलों में छह से ज्यादा गोल्ड मेडल हासिल करने वाली मीना सरकार की अनदेखी से आहत हैं।
2004 में भीम अवार्ड से नवाजी जा चुकी गांव मूंदी मीना का दावा है कि हाल में खेल कोटे से सब इंस्पेक्टर बने 20 खिलाड़ियों में अधिकांश की योग्यता उससे काफी कम है। मीना के मुताबिक उसने भी इस पद के लिए आवेदन किया था।
निर्धारित मापदंड के आधार पर उसका चयन लगभग तय था लेकिन सूची से उसका नाम गायब था। उसने कहा कि सरकार भीम अवार्ड से सम्मानित तो करती है लेकिन उसे नौकरी के लायक नहीं समझा जाता। ऐसे में सम्मान बचाए रखने के लिए भीम अवार्ड लौटाने के अलावा कोई विक्ल्प नहीं है। मीना ने बॉक्सिंग में नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर अनेक अवार्ड प्रदेश की झोली में डाले हैं।
महिला खिलाड़ियों का होता है शोषण : मीना का आरोप है कि महिला खिलाड़ियों का शोषण हो रहा है। विश्व चैंपियनशिप में तीसरा स्थान हासिल करने पर उसे 12 लाख रुपए मिले थे जबकि इतनी ही राशि कोच को मिलती है।
उस समय वह भिवानी कैंप में 20 दिनों से प्रैक्टिस कर रही थी। आरोप है कि भिवानी व एक अन्य कोच ने उसपर अपने पक्ष में बोलने के लिए परेशान किया। दिसंबर 2006 में नेशनल गेम्स में रजत जीतने के बाद वह कैंप वापस नहीं लौटी।
दो साल घर पर रहकर योगा से एमए किया। अब उसके पास इतने पैसे नहीं हैं कि प्रैक्टिस जारी रखे। मीना ने कहा कि नौकरी मिलने के बाद वह वापस बॉक्सिंग में आना चाहती थी लेकिन यहां भी भेदभाव की शिकार हो गई।
मीना की उपलब्धियां
2001: रेवाड़ी में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण।
2001 : पटियाला में नेशनल गेम्स में स्वर्ण।
2001: दिल्ली में नेशनल गेम्स में स्वर्ण।
2002: तुर्की में विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य।
2002 : हैदराबाद में नेशनल गेम्स में स्वर्ण।
2003 : मिजोरम में नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण।
2003 : हिसार में एशियन गेम्स में रजत।
2004 : असम में नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण।