Manoranjan
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इसे कहते हैं नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। चेन स्मोकर रहे सैफ अली खान केंद्र सरकार के सिगरेट पर लगाए गए प्रतिबंध पर खुशी व्यक्त करने से नहीं चूक रहे हैं। हालांकि वे यह जरूर मानते हैं कि यह एक बेहद व्यक्तिगत मसला है, जिस पर अंतिम फैसला एक लोकतांत्रिक देश में नागरिकों पर ही छोड़ देना चाहिए। गौरतलब है कि बीते दिनों हार्ट में हुई तकलीफ के बाद ही सैफ ने सिगरेट से तौबा की है। अन्यथा वह तो 16 वर्ष की उम्र से इसे अपने मुंह से लगाए घूम रहे थे।
सैफ बताते हैं कि लंदन में पढ़ाई के दौरान शौक ही शौक में सिगरेट मुंह से लगी थी और फिर वह कब आदत में शुमार हो गई पता ही नहीं चला। ऐसे में जब पिछले दिनों छोड़ने की बात आई तो दिल घबरा उठा। डेढ़ दो दशक की आदत छोड़ने में पसीने आ गए, लेकिन और कामों में मन लगाने से इससे निजात पाने में आसानी हुई।
तो क्या सिगरेट पर लगाए गए प्रतिबंध से इत्तेफाक रखते हैं प्रश्न पर उन्होंने कहा, ‘अब मैं दूसरे किनारे पर खड़ा हूं इसलिए इस प्रतिबंध से खुश तो हूं, लेकिन मैं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी पक्षधर हूं। आप इस बारे में कानून बना रहे हैं तो व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी ध्यान में रखें।
निश्चित तौर पर सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इस बारे में आप चेतावनी जारी कीजिए। इस तरह प्रतिबंधित तो न कीजिए। आखिर जो शख्स लंबे समय से सिगरेट पी रहा है वह एक-दो दिनों में उसे कैसे छोड़ देगा? इस बारे में धीरे-धीरे ही आगे बढ़ना चाहिए।’