मुंबई. शेयर बाजार की उथल-पुथल जीवन बीमा उद्योग को प्रभावित करने लगी है। उद्योग की विकास दर धीमी पड़ चुकी है। जीवन बीमा कंपनियां आशंका जताने लगी हैं कि सितंबर में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहेगा।
अगस्त 08 में बीमा उद्योग की प्रीमियम से आय घटकर 26,451 करोड़ रुपए रह गई थी, जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में यह 27,491 करोड़ रुपए रही थी। इस दौरान बीमा उद्योग की आय में गिरावट मुख्यत: एलआईसी का कारोबार 29 फीसदी की गिरावट दर्ज होने के कारण दिखी थी। तब एलआईसी का कारोबार घटकर 14,360 करोड़ रुपए पर आ गया था जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 20,206 करोड़ रुपए था।
जीवन बीमा उद्योग के ज्यादातर प्रतिनिधियों का मानना है कि विश्व बाजार में गिरावट के चलते उद्योग के कारोबार में गिरावट देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक जब तक अमेरिकी बाजार में वित्तीय संकट खत्म नहीं होता है।
पालिसी धारक शेयर बाजार आधारित यूनिट लिंक्ड बीमा योजनाएं लेने का निर्णय टाल सकते हैं। आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस की एमडी शिखा शर्मा का कहना है कि बीमा कंपनियों के कारोबार में मासिक आधार पर जरूर कुछ धीमापन है।
लोग अब भी रिटायरमेंट के लिए बचत करना चाह रहे हैं। लेकिन वे इस समय बाजार में स्थिरता लौटने का इंतजार कर रहे हैं। कंपनी के सीईओ और प्रेसीडेंट विक्रम मेहमी का कहना है कि निश्चित रूप से पूरा उद्योग जगत धीमेपन की चपेट में है।
बीमा कराने वालों के पास तरलता का संकट है और वे अपने फैसले टाल रहे हैं, जबकि खुदरा बिक्री मजबूत बनी हुई है। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के एमडी यूएस राय का मानना है कि बीमा क्षेत्र की वृद्धि दर में कुछ गिरावट को धीमेपन की संज्ञा देना ठीक नहीं है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट के बाद भी बीमा उद्योग ने बेहतर प्रदर्शन किया है और प्रीमियम में रिकार्ड वृद्धि दर्ज कराई है। बजाज एलांयज लाइफ इंश्योरेंस के सीईओ, कमलेश गोयल की राय है कि मौजूदा वातावरण में बीमा उद्योग को अपने कारोबारी माडल में बदलाव लाने की जरूरत है।