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तलाशने होंगे नए पोलिंग एजेंट

भोपाल. इस बार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए नई मुसीबत खड़ी होने वाली है। खासकर उन दलों के लिए जिनके पास कई क्षेत्रों में उम्मीदवार तो हैं, लेकिन पोलिंग बूथ स्तर पर कार्यकर्ता नहीं हैं।

चुनाव आयोग ने पोलिंग बूथ क्षेत्र के मतदाता को ही किसी उम्मीदवार का पोलिंग एजेंट बनाए जाने का नियम लागू कर दिया है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष इस नियम का विरोध किया है। आयोग ऐसे मतदान केंद्रों पर जहां पोलिंग एजेंट नहीं होंगे, विशेष पर्यवेक्षक तैनात करेगा। चुनाव आयोग के इस नए नियम से राजनीतिक दलों में बेचैनी है, क्योंकि अब तक किसी भी कार्यकर्ता को एजेंट नियुक्त कर दिया जाता था। जिन क्षेत्रों में पार्टी के कार्यकर्ता न भी हों तो दूसरे क्षेत्र के कार्यकर्ता एजेंट बनकर मौजूद रहते थे।

अब ऐसा नहीं हो पाएगा। भाजपा और कांग्रेस जैसे बड़े दलों में तो कम, लेकिन छोटे दलों में इससे नियम से ज्यादा दिक्कत है, क्योंकि कई दलों ने उन क्षेत्रों में भी अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, जहां उनकी पार्टी के कार्यकर्ता ही नहीं हैं।

माइक्रो आब्जर्वर नियुक्त होंगे
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता मंगलवार को भोपाल आए उप चुनाव आयुक्त आर.बालकृष्णन को भी जताई थी। श्री बालकृष्णन ने बताया कि पोलिंग बूथ पर मतदान शुरू होने से पहले उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट्स के सामने मतदान का प्रदर्शन कर संतुष्टि का प्रमाणपत्र लिया जाता है। जहां पोलिंग एजेंट नहीं होंगे, वहां के लिए आयोग विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त करेगा। इन्हें माइक्रो आब्जर्वर कहा जाएगा। यह पर्यवेक्षक उन बूथों पर भी तैनात किए जाएंगे, जिन्हें आयोग संवेदनशीन मानेगा।





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