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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की बैच शुरू

भोपाल. इंस्टीटच्यूट के डायरेक्टर और शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक विनोद कुमार सिंह इस ‘नर्सरी’ को अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के समकक्ष बनाने के प्रयास में जुटे हैं।

इंस्टीट्यूट के लिए अभी अमेरिका व जर्मनी के जाने-माने इंस्टीटच्यूट में पढ़ा चुके 15 फैकल्टी का चयन किया गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा खोले गए इस आईआईएसईआर के लिए केंद्र सरकार 800 करोड़ रुपए खर्च कर रही है तो राज्य सरकार ने 200 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई है।

देश में केवल पांच
देश में विज्ञान की शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए भोपाल सहित पांच शहरों में आईआईएसईआर खोले गए हैं, जहां साइंस में अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी पाठच्यक्रम संचालित हो रहे हैं। इनके अलावा एक और संस्थान बेंगलूर स्थित इंडियन इंस्टीटच्यूट ऑफ साइंसेस है, जिसका दर्जा आईआईटी के समकक्ष माना जाता है। वहां सिर्फ पोस्ट ग्रेजुएट व पीएचडी प्रोग्राम है।

हर साल 200 सीटें
इंस्टीटच्यूट में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजिकल, मैथेमेटिक्स, कम्प्यूटर साइंस तथा अर्थ एंड इन्वायरलमेंट साइंसेस में एमएस व पीएचडी की क्रमश: 200-200 सीटें रहेंगी। पांच साल बाद विद्यार्थियों की संख्या कुल दो हजार हो जाएगी। 12वीं के बाद एमएस पांच साल का कोर्स रहेगा। इसके बाद पीएचडी की सुविधा रहेगी। एमएस के लिए प्रवेश केंद्र सरकार की किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना, इंडियन नेशनल ओलिम्पियाड स्टेज-2 तथा आईआईटी-जेईई की मेरिट लिस्ट के आधार पर दिया जाएगा।

विश्वस्तरीय बनाने का सपना
केंद्र सरकार ने आईआईटी कानपुर के चेअर प्रोफेसर विनोद कुमार सिंह को पहला डायरेक्टर बनाकर भेजा है। श्री सिंह कई राष्ट्रीय अवार्ड और फैलाशिप प्राप्त कर चुके हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी यूएसए से पोस्ट डॉक्टोरल श्री सिंह का सपना आईआईएसईआर भोपाल में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्तर की शिक्षा दिलाने का है।

उपनगर जैसा रहेगा कैंपस
आईआईएसईआर का कैंपस एक उपनगर की तरह होगा। शैक्षणिक कार्य के लिए भव्य बिल्डिंग, स्टाफ के लिए आवासगृह, गेस्ट हाउस, दो स्वीमिंग पूल, स्टेडियम, बैंक, पोस्ट आफिस और शॉपिंग सेंटर बनेगा। निर्माण कार्यो पर 400 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जबकि 205 करोड़ रुपए के रिसर्च उपकरण आएंगे। 200 करोड़ रुपए स्थापना व्यय पर खर्च होंगे। 2010 तक इंस्टीटच्यूट अपने खुद के भवन में शिफ्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

10 विद्यार्थी, एक फैकल्टी
इंस्टीटच्यूट में प्रत्येक 10 विद्यार्थियों पर एक फैकल्टी के हिसाब से 200 फैकल्टी व गैर शैक्षणिक स्टाफ में 300 लोग रहेंगे। रिसर्च की विश्वस्तरीय गुणवत्ता हासिल करने जो फैकल्टी रखी जाएगी उसके लिए न्यूनतम अर्हताओं के साथ ही विदेश के किसी प्रतिष्ठित इंस्टीटच्यूट में तीन साल का अनुभव अनिवार्य किया गया है। आईआईएसईआर भोपाल के लिए अमेरिका व जर्मनी के जाने-माने इंस्टीटच्यूट में पढ़ा चुके 15 फैकल्टी का चयन किया गया है।

भोपाल में हर साल तैयार होंगे 400 वैज्ञानिक
भोपाल में वैज्ञानिकों की ‘नर्सरी’ में हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर के 400 वैज्ञानिक तैयार होंगे। गोविंदपुरा में इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के 20 विद्यार्थियों का पहला बैच शुरू भी हो चुका है। शीघ्र ही राजधानी के नजदीक भौंरी में 800 करोड़ की लागत से आईआईएसईआर का कैंपस बनने जा रहा है जिसकी आधारशिला 8 अक्टूबर को प्रधानमंत्री रखेंगे।





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saket mishra
Friday, 3rd Oct 2008, 15:22
yah jo prayas kiya gaya hai iska murt roop wastav main madhya pradesh k liye ek shandar uplabdhi bankar ubhrega.... is tarah k sansthan agar nikat hote hain to student bhi use jankar usme ruchi lete hain aur unki phir ek chahat ban jati hai ki main aage is sansthan ka sadasya banun.main ise shining india ki pahal main ek bada kaam mnta hoon.aur pradhanmatri resp.MM Singh ko dhanyabad deta hoon.