इंदौर. सभी तीज-त्योहार पर आकर्षक श्रंगार के लिए प्रसिद्ध गौराकुंड स्थित विजयेश्वरी देवी मंदिर में नवरात्रि के श्रंगार के लिए दो महीने पहले से लोगों ने आग्रह किया था अब नंबर आ रहा है। मंदिर के पं. मनोहर त्रिवेदी के अनुसार श्रंगार के लिए रोजाना पांच-सात लोग आ रहे हैं लेकिन अभी समय देना संभव नहीं है। कई लोगों को अगली चैत्र नवरात्रि के लिए कहा है वहीं कुछ लोगों ने आगे तीज-त्योहार पर श्रंगार के लिए कह दिया है।
वर्ष र्पयत कई दिनों का इंतजार
एरोड्रम रोड स्थित श्रीश्री विद्याधाम में माताजी के श्रंगार के लिए सालभर 12-15 दिन का इंतजार रहता है। नवरात्रि के लिए लोगों ने दो-तीन महीने पहले कहा था उनका नंबर अब आया। श्रीश्री विद्याधाम के ट्रस्टी पं. दिनेश शर्मा के अनुसार माताजी को सदैव नई साड़ी पहनाई जाती है। वर्ष र्पयत श्रंगार के लिए भक्तों की संख्या ज्यादा होती है इसलिए श्रद्धालुओं को इंतजार करना होता है। कोई व्यक्ति यदि चाहे तो माताजी के चरणों में श्रंगार सामग्री रखकर वापस लौटा दी जाती है।
बारी अगली चैत्र नवरात्रि में
बिचौली मर्दाना रोड के श्रीश्री वैष्णवधाम में नवरात्रि पर मातारानी के श्रंगार के लिए चार महीने से लोगों के लिए तारीख पक्की कर दी थी। जाग्रति महिला मंडल की विनोद अहलूवालिया और अभिषेक अहलूवालिया ने कहा चैत्र नवरात्रि की तारीख भी लोग तय करवा रहे हैं। चैत्र नवरात्रि में जिन लोगों के नंबर नहीं आए थे उनके श्रंगार का नंबर अब आया। जिन लोगों ने पिछली चैत्र नवरात्रि में बुकिंग कराई थी और जिनके नंबर नहीं आए थे, उनका श्रंगार इस चैत्र नवरात्रि में किया गया।
बिजासन माता मंदिर सबसे ज्यादा आस्था
बिजासन माता के पुजारी दौलत वन ने बताया नवरात्रि में श्रंगार के लिए पहले तारीखें तय हैं। मंदिर में लाखों लोगों की आस्था है इसके चलते कोई श्रद्धालु आता है तो उसकी श्रंगार सामग्री माता के चरणों में रख दी जाती है।
अन्नपूर्णा मंदिर चरणों में चढ़ा देते हैं
अन्नपूर्णा माता मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंदगिरि महाराज वेदांताचार्य ने बताया जो भी श्रद्धालु आता है उनकी साड़ी-चुनरी और सुहाग का सामान माता के चरणों में रख देते हैं या साड़ी-चुनरी ओढ़ा देते हैं।
कैला माता मंदिर दो महीने पहले
बियाबानी के कैला माता मंदिर के संचालक बाबू राजोरिया के अनुसार शारदीय और चैत्र नवरात्रि के लिए हर बार श्रद्धालु दो महीने पहले तारीख तय करवा लेते हैं। जिन लोगों ने साड़ी-चुनरी और सुहाग सामग्री दे दी है उनका उपयोग अब आगे करेंगे।