इंदौर. देशभर में बढ़ती आंतकी घटनाएं व जेलों में बंद खतरनाक कैदियों पर चौकसी को लेकर सरकार प्रहरी और मुख्य प्रहरियों के 533 पद बढ़ाने की स्वीकृति दी है। इससे प्रदेश की जेलों के वर्तमान अमले में पहली बार करीब 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके बावजूद भी जेल मैन्युअल के अनुसार जितना स्टाफ चाहिए वह संख्या पूरी होने में काफी दूर है। दो दिन पहले हुई कैबिनेट की अंतिम बैठक के बाद 31 साल बाद इसी माह से नई भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि राज्य में किन जिलों को कितने नए पद दिए जाएंगे। राज्य में कुल 120 जेल हैं जिनमें आठ सेंट्रल जेल, 22 जिला जेल और शेष उपजेल हैं। इंदौर अकेला ऐसा जिला है जहां सेंट्रल व जिला जेल हैं।
प्रदेश की जेलों में इस वक्त 32 हजार कैदी हैं, जो क्षमता से अधिक हैं। इंदौर सेंट्रल जेल का ही उदाहरण लें तो यहां आठ सौ कैदी की क्षमता के मुकाबले करीब ढाई हजार कैदी रहते हैं। गुरुवार (2 अक्टूबर) को भी यहां 24 सौ कैदी थे।
15 कैदी पर है एक प्रहरी
जेलों में 2923 प्रहरी और मुख्य प्रहरी हैं। इससे पहले वर्ष 1977 में मात्र दो सौ पद बढ़े थे। जेल मैन्युअल के मुताबिक पांच कैदी पर एक प्रहरी होना चाहिए किंतु वर्तमान संख्या को देखते हुए 15 कैदी पर एक प्रहरी है। सेंट्रल जेल इंदौर में 24 सौ कैदियों के मुकाबले मात्र 12 मुख्य प्रहरी और 101 प्रहरी हैं।
कुछ तो राहत मिलेगी
सेंट्रल जेल इंदौर के अधीक्षक संजय पांडे का कहना है नई पद स्थापित करने से कुछ तो राहत मिलेगी ही।