इंदौर. शहर अपने संस्कार खो रहा है, जिसका सबूत है आए दिन हड़ताल, बंद एवं चक्काजाम जैसी घटनाएं होना। इससे शहर की फिजा खराब हो रही हैं। जबरिया बंद एवं हिंसक हड़ताल अवैध है। हिंसा की बढ़ रही प्रवृत्तियां आयोग के लिए भी चिंता का विषय है।
यह बात म.प्र. मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी.एम. धर्माधिकारी ने गुरुवार को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय सभागृह में अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कही। संगोष्ठी का विषय था-बंद, हड़ताल एवं चक्काजाम। उन्होंने कहा प्रजातंत्र अब भीड़तंत्र में बदल गया है। देश की आजादी के लिए गांधीजी ने सत्याग्रह का सहारा लिया था लेकिन हड़ताल के नाम पर असामाजिक तत्व हिंसा फैला रहे हैं। हड़ताल एवं बंद की भी आचार संहिता होना चाहिए।
मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत राज्यपाल न्यायमूर्ति वी. एस. कोकजे ने कहा कानूनों का सख्ती से पालन करवाने के लिए जरूरी है कि नई टेक्नोलॉजी विकसित की जाए। पुलिस सुधार के साथ कानूनों में भी सुधार होना चाहिए। आए दिन की रैली, बंद एवं हड़ताल से आम नागरिक परेशान होता है। वे संविधान के मौलिक अधिकारों के तहत कोर्ट में अपील कर सकता है। पहले सिर्फ श्रमिक ही हड़ताल करते थे लेकिन अब तो शासकीय कर्मचारी भी हड़ताल कर रहे हैं।
शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अन्य वक्ताओं ने शहर में निकल रही रैलियों पर भी आपत्ति ली। पूर्व आईजी इंदौर विनय अग्निहोत्री, इंदौर रेंजआईजी अनिल कुमार, पंकज दुबे, डॉ. जवाहर बियाणी, पूर्व आईपीएस मदन राने, अभ्यास मंडल के मुकुंद कुलकर्णी, जिला आयोग मित्र संघ के संयोजक आर.जी. फड़के और प्रोफेसर ए.ए. अब्बासी ने भी संबोधित किया।
संगोष्ठी में सभी वक्ता विषय से भटके। अधिकांश वक्ताओं आतंकवाद, पुलिस रिफोर्म एवं अपराधियों के बारे में बोला। अपनी बारी आने पर श्री कोकजे ने संबोधन के पहले ही कहा कि अन्य वक्ता विषय से भटक गए लेकिन मैं विषय पर ही बोलूंगा।