इंदौर. जिले के पांच विधायकों की शिकायत के बावजूद सरकार ने भ्रष्टाचार और कदाचरण के दोषी अधिकारी को सजा देने के बजाय तरक्की देकर राज्य ओपन स्कूल का संचालक बना दिया। शिकायत करने वाले पांच में से दो विधायक अब दुनिया में नहीं हैं तथा मुख्यमंत्री भी बदल चुके हैं।
मामला है जिला शिक्षा अधिकारी रह चुके बी.के. शर्मा का, जिन्हें हाल ही में उज्जैन संयुक्त संचालक से राज्य ओपन स्कूल का संचालक बनाया गया है। इनके खिलाफ पूर्व शिक्षा मंत्री स्व. लक्ष्मणसिंह गौड़, पूर्व वन राज्यमंत्री स्व. प्रकाश सोनकर, विधायक उषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया और मनोज पटेल ने तीन पेज की शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर से की थी और अनुरोध किया था कि बारीकी से छानबीन कर उक्त अधिकारी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करें। क्योंकि इससे सरकार की छबि धूमिल हो रही है।
यह थे शिकायत के बिंदु
>> इंदौर में जिला शिक्षा अधिकारी पदस्थ होने से पहले भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित थे।
>> इंदौर में पदस्थ होने के बाद विधायक लक्ष्मणसिंह गौड़ ने प्रश्न क्रमांक- 659 से भ्रष्टाचार की पोल विधानसभा में खोली।
>> उज्जैन में पदस्थ रहते शिक्षाकर्मी योजना लागू होने के बाद भी वर्ष 98 के नौ शिक्षकों को नियमित वेतनमान देने के मामले में विभाग के अपर सचिव ए.के. कुरूप ने कदाचरण का दोषी पाया।
>> 2000 में पुनर्मूल्यांकन समिति अध्यक्ष के रूप में उज्जैन में ही आठवीं के 392 छात्रों का रिजल्ट प्रभावित किया।
>> इंदौर में एक निजी स्कूल को नकल की विशेष छूट दी, शिकायत मिलने पर विद्यालय के दस्तावेज जब्त कर तत्कालीन एडीएम मनीषसिंह द्वारा जांच कर कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी।
>> सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करते हुए कई स्कूलों में मध्यान्ह भोजन नहीं बांटा गया। जिले में मध्यान्ह भोजन योजना में गड़बड़ी की गई। शहर के ३क् संकुलों में से १९ में हर महीने एक लाख रुपए प्रति संकुल राशि बचा ली गई। विधानसभा में मामला सामने आया।
>> शासकीय निर्देश के बाद भी शिक्षण संस्थाओं के सरकारी कर्मचारियों को परिचय पत्र लगाने के गलत निर्देश दिए और इंदौर के फोटो स्टूडियो से परिचय पत्र बनवा लिए। मामला विधानसभा में गूंजा।
>> शिक्षाकर्मियों के तबादले में राज्य शासन के नियमों व स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करते हुए इंदौर नगर क्षेत्र के लिएआबंटित १क्४ पदों में गांवों से शहर मंे सैकड़ों शिक्षाकर्मी स्थानांतरित कर दिए। परिणामस्वरूप गांवों में शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूल बंद हो गए।
>> विधानसभा में मुद्दा सामने आया तो विभाग ने इन सभी शिक्षाकर्मियों को डेढ़ से दो साल बाद वापस भेजने के निर्देश दिए लेकिन इन निर्देशों में भी गड़बड़ी की गई जिसके लिए उच्च न्यायालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया।
>> गोकुल गांव में आठ कक्षाओं में पढ़ रहे १८३ विद्यार्थियों के लिए दो शिक्षक पदस्थ किए, शिकायत हुई तो एक शिक्षक और बढ़ाया। कुछ दिनों बाद उसे वहां से फिर इंदौर बुला लिया।
चर्चा करूंगी
हां, शिकायत की थी, पर प्रमोशन की जानकारी मुझे नहीं है। यदि ऐसा है तो मंत्री से चर्चा करूंगी।
- उषा ठाकुर, विधायक, क्षेत्र -1
फिर उठाएंगे मामला
मामला मेरी जानकारी में है। हमने मुहिम चलाई थी। यदि ऐसा हुआ है तो पूरे मामले को फिर से उठाएंगे।
- मनोज पटेल, विधायक, देपालपुर
पहले चर्चा कर लूं
उनका तबादला हो गया था। यदि उन्हें फिर से कोई पद मिला है तो मंत्री से चर्चा के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
- महेंद्र हार्डिया, विधायक क्षेत्र-5
मिसगाइड किया
सभी आरोप मनमाने ढंग से लगाए गए थे। किसी ने उन्हें मिसगाइड किया था। शासन को उसी समय पक्ष बता दिया था कि प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप से तबादले हुए थे।
- बी.के. शर्मा, संचालक, राज्य ओपन स्कूल