इंदौर. प्रदेश में बिजली संकट दूर करने के लिए सारणी में 2600 करोड़ रुपए की लागत से लगाई जाने वाली 250-250 मेगावाट की दो विद्युत उत्पादन इकाइयां समय पर शुरू नहीं हो पाएंगी।
म.प्र. पावर जेनरेटिंग कंपनी की लापरवाही के कारण भू-अर्जन की प्रक्रिया रुक गई है। अब यह प्रोजेक्ट तय समय सीमा से लगभग तीन साल पिछड़ जाएगा।
यही नहीं, अभी तो केंद्र ने भी इसे अनुमति नहीं दी है। 13 सितंबर को दिल्ली में सुनवाई के बाद इसका भविष्य तय होगा जबकि मुख्यमंत्री लगातार जनदर्शन कार्यक्रमों में इन इकाइयों का जिक्र करते हुए लोगों से बिजली संकट दूर कर देने का वादा कर रहे हैं।
दोनों यूनिट 10 व 11 के लिए कुल 333 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की जान थी। इसमें 80 हेक्टेयर वन भूमि है। राखड़ बांध के लिए भी अभी भारत सरकार से अनुमति और अनापत्ति पत्र नहीं मिला। इसके बावजूद भू-अर्जन की कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। 3 जुलाई को पावर जेनरेटिंग कंपनी की लापरवाही उजागर होने के बाद बैतूल कलेक्टर अरुण कुमार भट्ट ने इस पर रोक लगा दी।
पांच गांवों की जमीन लेना है
म.प्र. पावर जेनरेटिंग लिमिटेड सारणी के राखड़ बांध हेतु पांच गांवों विक्रमपुर, घोघरी, रयावड़ी, सेमरताल व धसेड़ की 180 हेक्टेयर निजी जमीनों के अर्जन के मामले न्यायालय में हैं।
देरी के लिए पावर जेनरेटिंग कंपनी जिम्मेदार
भू-अर्जन की कार्रवाई पावर जेनरेटिंग कंपनी की लापरवाही से ही रुकी है। भू-अर्जन, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बैतूल द्वारा कलेक्टर को लिखे गए पत्र में की गई अनुशंसा:
- 3 जुलाई 2008 को हुई ग्रामसभा में आए तथ्यों से खुलासा होता है कि पुनर्वास नीति आज भी अपूर्ण और अस्पष्ट है।
- प्रभावित ग्रामीणों की परिस्थिति व उनका सर्वे किए बिना ही पुनर्वास प्लान प्रस्तुत किया गया।
- विधिवत तार्किक प्लान के बिना भू- अर्जन करने से भीषण मानवीय समस्याऔर व कानून-व्यवस्था से जूझना पड़ेगा।
- जब तक पावर जेनरेटिंग कंपनी द्वारा पुनर्वास हेतु विधिवत एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पुनर्वास प्लान तैयार नहीं किया जाता तब तक धारा 4 के प्रकाशन की कार्रवाई को निरस्त करना उचित है।
पुनर्वास प्लान की वजह से रुका भूअर्जन
पावर जेनरेटिंग कंपनी द्वारा उचित पुनर्वास प्लान नहीं दिए जाने से भू-अर्जन की कार्रवाई रोकना पड़ी। धारा 4 के तहत अगली बार पूरी प्रक्रिया को दोहराना पड़ेगा। इससे प्रोजेक्ट में कुछ देरी हो सकती है।
-अरुण भट्ट, कलेक्टर, बैतूल
अभी तो पुनर्वास नीति और सरकार से अनुमति भी नहीं
- सारणी प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन की कार्रवाई क्यों रुक गई है?
नहीं, ऐसा तो विरोधी कह रहे हैं। हमने बैतूल कलेक्टर को आवेदन दे दिया है। हमने फीस जमा कर दी है और धारा 4 के तहत कार्रवाई हो रही है।
- कलेक्टर ने ही भू-अर्जन की कार्रवाई रोकने के लिए पत्र लिखा है?
- इसका जवाब नहीं दे सके।
बगैर सर्वे के पुनर्वास नीति कैसे बना दी पावर जेनरेटिंग कंपनी ने?
- हमने इसमें वही पुनर्वास नीति लागू की है जो मारवाह पावर प्रोजेक्ट में की गई थी। वह तो सरकार ने पास कर दी थी। यह भी पास हो जाने की उम्मीद है।
- दोनों नई इकाइयों के बारे में तो सरकार ने अभी अनुमति ही नहीं दी है?
- 13 अक्टूबर को ऊर्जा मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और हाई पावर कमेटी की सुनवाई है। उम्मीद है उस दिन एमओयू साइन हो जाएगा।
- विशेषज्ञों का मानना है भू-अर्जन रुकने से प्रोजेक्ट तीन साल तक पीछे हो जाएगा? इस नुकसान के लिए कौन जिम्मेदार है?
सिर्फ भू-अर्जन की वजह से देरी नहीं हो रही है। केंद्र सरकार के पास कोयला भी नहीं है। जब तक प्रोजेक्ट को कोल लिकेंज की अनुमति नहीं मिलेगी तब तक यह शुरू नहीं हो पाएगा। अभी तो लाइन में 70-80 कंपनियां हैं।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बीएचईएल (भेल) को एक अरब रुपए से ज्यादा दिए हैं? देरी से सरकार को ब्याज का नुकसान नहीं होगा?
- भेल को इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए पावर जेनरेटिंग और सरकार का पैसा दिया गया है। यह लोन नहीं है। उन्हें टर्बाइन डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग और कच्च माल खरीदने के लिए दो-ढाई साल लगेंगे।
-डी.एन. प्रसाद, सीएमडी, म.प्र. पावर जेनरेटिंग कंपनी, जबलपुर