जयपुर. सुखम गार्डन स्थित कोठी नंबर 7 से बेदखल किए गए पीड़ित परिवार के लोगों के साथ एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को रिसीवर आफ प्रोपर्टीज जस्टिस यूएन बछावत से मुलाकात की और फिर से बसाने की मांग करते हुए उन्हें ज्ञापन सौंपा।
बछावत ने पीड़ितों से रात के समय हुए संपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी ली और पीड़ितों को फिर से सुखम गार्डन में बसाने का भरोसा दिलाया।
आफिसर इंचार्ज रिसीवर प्रोपर्टीज राजेश कर्नल के निवास पर सुबह पीड़ित परिवारों व प्रतिनिधि मंडल के सदस्य पहुंचे। कर्नल ने बछावत को पीड़ितों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पीड़ितों ने होटल राजमहल पैलेस पहुंचकर बछावत को ज्ञापन सौंपा।
इस पर बछावत ने एक-एक सदस्य की बात ध्यान से सुनी। सरदारसिंह, राजेंद्र सिंह, श्यामसिंह समेत 8 पीड़ितों ने कहा कि उन्हें 22 सितंबर की रात 3 बजे पुलिस, जिला प्रशासन व नगर निगम के अफसरों ने जबरन जगाया और सामान ट्रकों में डालना शुरू कर दिया। विरोध करने पर मारपीट की और घसीटा। बाद में उन्हें बक्सावाला पहुंचा दिया।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने कहा कि प्रशासन ने 400 करोड़ की जमीन पर रसूखदार का कब्जा कराने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया। जस्टिस बछावत ने कहा कि कानूनी कार्रवाई के बाद ही उन्हें बसाया जा सकता है। गुरुवार सुबह प्रतिनिधिमंडल से मिलने के बाद जस्टिस बछावत ने शाम को पीड़ित परिवार के सदस्यों को फिर बुलाया और उनकी ओर से की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। पीड़ितों ने कहा कि पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो कोर्ट में इस्तगासा दायर किया है।
अफसरों की ओर से किए गए र्दुव्यवहार के बारे में बताते हुए गुलाब कंवर ने कहा कि प्रशासन के लोगों ने रसूखदार के दबाव में आकर 60 वर्र्षो से रह रहे हमारे परिवार के सदस्यों के साथ अपराधियों का सा व्यवहार किया। प्रशासन के अधिकारियों व रसूखदार ने उनसे जबरदस्ती हस्ताक्षर करा लिए।
शिवसेना के उपजिला प्रमुख रामावतार जांगिड़, राजस्थान स्टेट एक्स सर्विसमेन वेलफेयर सोसायटी जयपुर के सचिव प्रेमसिंह खिरोड़ सहित 16 लोगों ने भी बछावत को प्रशासन व रसूखदार की साठगांठ के बारे में बताया और पीड़ितों को बसाने की मांग की। खिरोड़ ने बताया कि खाली कराया गए परिसर में दिवंगत मदन सिंह का परिवार वर्ष 1944 से रह रहा है।