News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. डोंगरगढ़ की पदयात्रा पर निकले भक्तों की अर्थियां उठीं तो सारा मोहल्ला रो पड़ा। नवरात्र पर गुरुवार सुबह संतोषीनगर से 12 युवक-युवतियों का दल निकला था। भगवा रंग में रंगे सभी पदयात्री रायपुर-दुर्ग फोरलेन से होते हुए डोंगरगढ़ जा रहे थे। चरौदा के पास एक तेज रफ्तार ट्रक आठ श्रद्धालुओं को चपेट में लेता हुआ निकल गया।
मीना दीप (12) पिता सुरेशदीप की मौके पर ही मौत हो गई। सात घायलों में से छत्तीसगढ़नगर निवासी विजय साहू (19) पिता कमल साहू और महेंद्र उर्फ छोटू तांडी (26) पिता लालमंद तांडी की अस्पताल में मौत हो गई।
महेंद्र और विजय अपने घरों में एकमात्र कामकाजी युवक थे। दोनों रोजी-मजदूरी करते थे। दोनों परिवारों के लिए यह बड़ा झटका है। दोनों हर साल पैदल बम्लेश्वरी के दर्शन को जाते थे। आज तीनों का शव जैसे ही मोहल्ले में लाया गया, चीख-पुकार मच गया। परिजनों की बुरी हालत थी। वे रो-रोकर बेहाल थे।
सर्विस लेन में कब्जे
रायपुर-दुर्ग फोरलेन पर अवैध कब्जों की वजह से अब हर रोज हादसे हो रहे हैं। दर्जनों जगहों से अधूरी सड़कों पर जगह-जगह कब्जे हैं। सर्विसलेन में रात को लाइन से ट्रक खडे रहते हैं। इसलिए बहुत से लोग सर्विस लेन की जगह मुख्य सड़क का इस्तेमाल करते हैं।
चौक-चौराहों पर सिगनल सिस्टम भी फेल है। लेकिन रोड बनाने वाली कंपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं दिखती। डोंगरगढ़ के लिए निकला संतोषीनगर का जत्था जिस वक्त हादसे का शिकार हुआ वह मुख्य सड़क पर था।
मौत के रास्ते
फोरलेन की शुरुआत में ही टाटीबंध चौक पर दोनों सर्विस रोड पर दर्जनों ट्रकों की लाइन लगी रहती है। यहां से आगे चंदनीडीह मोड़ पर छोटे पुलों से होते हुए ट्रकें अचानक मुख्य सड़क पर आती हैं। यहां कई हादसे हुए हैं। यहां से फिर टोल प्लाजा के आगे कुम्हारी थाने के सामने भी सर्विस रोड कटी हुई है। यहां भी आए दिन हादसे हुए हैं।
कुम्हारी चौक पर सिगनल हफ्ते में पांच दिन बंद रहता है। कभी बाइक तो कभी ट्रकों से हादसे हुए हैं। थोड़ा आगे सांई मंदिर से लगे ढाबों के सामने दर्जनों ट्रक खड़े रहते हैं। कई शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। चरोदा में तो सर्विस लेन पर जगह-जगह दुकानों और निजी वाहन वालों ने कब्जा कर रखा है। फिर भिलाई-3 में भी सर्विस रोड कई जगहों से कब्जों से पटी है। पावरहाउस, खुर्सीपार, जवाहरमार्केट, सुपेला चौक, आगे नेहरूनगर तक फोरलेन खतरों से भरा है। कब्जों से सर्विस लेन का कांसेप्ट ही खत्म हो चुका है। साथ ही डिवाइडर की अव्यवस्था के कारण भी ढेरों हादसे हुए हैं।
दो सालों में 25 मौतें
पिछले दो सालों में फोरलेन पर 80 से ज्यादा छोटे-बड़े हादसे हुए हैं। इनमें 25 से ज्यादा व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार की वजह से हुए हैं। फोरलेन बनाने वाली कंपनी ने सड़क को दर्जनों जगह अधूरा भी छोड़ रखा है, जो हादसों की प्रमुख वजह है। सर्विस लेन पर बेजा कब्जों और खड़े ट्रकों की वजह से भी हादसे हुए हैं।