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अवैध खनन पर जिम्मेदारी तय

नई दिल्ली. छग में वनभूमि के कई हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट की उच्च अधिकार प्राप्त समिति ने शासन-प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है।

भैंसा कन्हार क्षेत्र में अवैध खनन पर कमेटी की रिपोर्ट में कांकेर के तत्कालीन कलेक्टर को हर स्तर पर दोषी बताते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करके कार्रवाई करने की सिफारिश की गई है। साथ ही खनन का पट्टा गलत तरीके से हासिल करके लौह अयस्क का खनन करने के लिए अनिल लुनिया को दोषी ठहराते हुए उससे रिकवरी करने की सिफारिश की गई है। मुख्यमंत्री रमन सिंह पर भी रिपोर्ट में टिप्पणी करते हुए उनकी भूमिका पर सवाल उठाया गया है। बालको और एस्सार की पाइप लाइन के मामले में समिति अपनी रिपोर्ट पहले ही दे चुकी है।

राज्य सरकार जिम्मेदार : कमेटी ने अपनी जांच में पाया है कि राज्य सरकार ने वन विभाग की जांच के दौरान अवैध खनन की जांच की बात पुख्ता हो जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। पूरे मामले में सरकार की भूमिका की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि हर स्तर पर नियमों की अवहेलना के बावजूद खनन पर रोक नहीं लगाई गई और पूरे मामले को कमेटियों के गठन और जांच के आदेश के बहाने लटकाए रखा गया।

तय मात्रा से ज्यादा खनन : सुप्रीम कोर्ट की समिति ने कहा है कि अगर लीज को सही भी मानते तो संस्तुति के मुताबिक छह हजार मीट्रिक टन सालाना खनन किया जाना था,लेकिन एक साल में ही साठ हजार टन से ज्यादा खनन किया गया।

ये हैं प्रमुख सिफारिशें
वन नियमों के उल्लंघन, धोखाधड़ी,अवैध मिलीभगत और गलत ढ़ग से पटटा धारक को फायदा पहुचाने के लिए तत्कालीन कलेकटर के खिलाफ आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा,राज्य सरकार को मुआवजा के निर्देश, पटटा धारक अनिल लूनिया को दस साल के लिए काली सूची में डाला जाए।





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