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नौकरी के नाम पर 20 लाख की ठगी

बिलासपुर. रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर दो रेलवे कर्मियों ने मिलकर चार बेरोजगार युवकों को ठग लिया। उन्होंने युवकों से कुल 20 लाख रुपए ऐंठ लिए। इसके बावजूद नौकरी न मिलने पर युवकों ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। पुलिस ने आरोपियांे के खिलाफ चारसौबीसी का अपराध दर्ज कर लिया है।

सिविल लाइन पुलिस के अनुसार नीलांबर सिंह और प्रताप सिंह चौहान रेलवे कर्मी हैं। 20 जुलाई 2007 को दोनांे की भेंट लोको खोली निवासी फूल सिंह राजपूत पिता आशाराम (30) से हुई। उन्होंने उसे रेलवे में कामर्शियल क्लर्क या टिकट चेकर की नौकरी दिलवाने का झांसा दिया। उन्होंने कहा कि अगर वह रुपए खर्च करने के लिए तैयार हो, तो वे उसे रेलवे में नौकरी दिलवा सकते हैं। फूल सिंह ने उनसे पूछा कि कितना खर्च आएगा?

उन्होंने कम से कम पांच लाख रुपए खर्च होने की बात कही। इस पर वह रकम देने के लिए राजी हो गया। दोनांे ने उससे तीन किश्त में रकम की मांग की। इस बीच तीन अन्य युवक इमलीपारा निवासी शरद अंचल, कुदुदंड निवासी मनीष ठाकुर और राजनांदगांव निवासी ओमेश सूर्यवंशी भी नौकरी पाने की आस में उनके झांसे में आ गए। वे भी रेलवे में नौकरी के एवज में उन्हें पांच लाख रुपए देने के लिए तैयार थे।

नीलांबर और प्रताप ने चारांे युवकांे को रेलवे का फार्म भरने के लिए कहा। युवकों ने उनके कहने पर फार्म भरकर जमा कर दिया। फिर वह ट्रेनिंग दिलाने के नाम पर चारों युवकों को लेकर अलीपुर ले गया। कुछ दिन वहां रुकने के बाद उन्होंने कहा कि अब ट्रेनिंग पूरी हो गई है और वे युवकों को लेकर शहर लौट आए। कुछ दिन बाद नीलांबर ने चारों युवकों को अपने विद्यानगर स्थित निवास में बुलवाया और उन्हें नार्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे, गुवाहाटी का एक पत्र दिखाया। पत्र मंे युवकों की नियुक्ति का जिक्र था। इसके बाद उसने चारों युवकों से तीसरी और अंतिम किश्त के रूप में दो-दो लाख रुपए ले लिए। उन्होंने चारों युवकों से पांच-पांच लाख रुपए ले लिए थे।

पत्र में चारों को अलीपुर में ज्वाइन करने बात कही गई थी। प्रताप व नीलांबर उन्हें एक बार फिर लेकर अलीपुर ले गए और कुछ दिनांे में वापस लौट आए। उन्होंने युवकों को ज्वाइनिंग की तारीख नहीं बताई थी। युवक तारीख के लिए भटकते रहे। कई बार उनसे संपर्क करने के बाद भी जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने रेलवे के संबंधित दफ्तर में संपर्क किया। वहां से उन्हें इस तरह की कोई नियुक्ति नहीं होने का जवाब मिला।

उन्होंने रेलवे के पत्र की जांच कराई तो पता चला कि लेटर फर्जी था। युवक समझ गए कि उन्हें ठग लिया गया है। वे अपने रुपए वापस लेने के लिए दोनांे के चक्कर काटने लगे। काफी दिन घूमने के बाद भी जब उनके रुपए वापस नहीं मिले, तब उन्होंने सिविल लाइन थाने में घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों आरोपियांे के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।





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