मुंबई. दुनियाभर के निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी सरकार की 700 अरब डालर की राहत योजना दुनिया की अर्थव्यस्थाओं को मंदी के संकट से निकालने में नाकाफी साबित होगी। शुक्रवार को इसी आशंका के चलते अमेरिका सहित दुनिया के शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई।
विदेशी बाजारों में गिरावट:
यूएस बाजारों के सूचकांक जहां 4-7.34 फीसदी गिरकर बंद हुए, वहीं एशियाई बाजारों में ढाई से तीन फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।
अछूते नहीं रहे घरेलू बाजार :
बिकवाली की इस आंधी से घरेलू बाजार भी अछूते नहीं रहे। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 4.05 या 529 अंक गिरकर 12,526 पर बंद हुआ। यह सेंसेक्स का 18 माह का न्यूनतम है। 3 अप्रैल 2007 को यह 12,625 पर बंद हुआ था।
चौतरफा बिकवाली का जोर :
अमेरिकी और एशियाई बाजारों में गिरावट के संकेतों के बाद घरेलू बाजार में निवेशकों ने मेटल, तेल और बैंक शेयरों समेत सभी सेक्टरों में बिकवाली की। टाटा स्टील व स्टरलाइट इंड. के शेयरों की अगुआई में मेटल सूचकांक 7.01 फीसदी गिरकर 8,417 पर बंद हुआ। आरआईएल की अगुआई में तेल इंडेक्स 5.74 फीसदी गिरकर 8,427 पर बंद हुआ। कंपनी के शेयरों में 7.67 फीसदी गिरावट हुई।
क्या रहे कारण:
>> वैश्विक वित्तीय संकट के चलते अमेरिकी हेज फंड कारोबार समेट रहे हैं।
>> इसी रणनीति के तहत ये हेज फंड भारत जैसे विभिन्न बाजारों से अपना धन खींच रहे हैं।
>> अमेरिका में सितंबर में 1.59 लाख नौकरियां घटाई गई हैं। यह पांच साल की सबसे बड़ी कटौती है।
>> अस्थिरता के माहौल में घरेलू फंडों द्वारा खरीदी न करना भी गिरावट का बड़ा कारण है। क्या करें निवेशक: प्राथमिकताओं-आवश्यकताओं का आकलन करें। हमेशा वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखें।
>> ये वित्तीय लक्ष्य परिवार की जरूरतों, शिक्षा या सेवानिवृत्ति के बाद जीवनयापन से जुड़े होंगे।
>> निवेश की अवधि का लक्ष्य पहले से निर्धारित करें। बाजार में लंबी अवधि का लक्ष्य लेकर निवेश करें।
>> इस समय रियल एस्टेट में निवेश से बचें। देशभर में प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट का रुख है।
>> निवेश की योजना को फिर निर्धारित करें। शेयर बाजार में निवेश घट गया हो या बिल्कुल न हो, तो अलग-अलग सेक्टर में धीरे-धीरे निवेश करें।
>> अगर आप करदाता नहीं हैं या निचले कर दायरे में आते हैं तो अपनी अल्प बचत को छोटी अवधि की फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करें।
>> अधिक कर दायरे में आने वाले निवेशकों के लिए लिक्विड प्लस फंड, शॉर्ट टर्म फिक्स्ड मेच्योरिटी प्लान और एफडी में मिलाजुला निवेश करना बेहतर रहेगा।
>> शॉर्ट टर्म में हुए नुकसान की भरपाई के लिए अधिक जोखिम न लें।
>> लीवरेज या डेट से दूर रहना बेहतर है।