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बालिका वधू’, आने में लगे सोलह साल

जयपुर.ग्यारह साल की ‘बालिका वधू’ को स्क्रीन तक आने में 16 साल लग गए। आते ही उसने अपनी मासूमियत और भोलेपन से छोटे शहंशाह से लेकर अनुपम खेर तक को अपना मुरीद बना लिया। पारम्परिक परिधानों में रहने वाली बालिका वधू अब आने वाले समय में बड़े पर्दे पर स्विमिंग पूल के किनारे मॉडर्न आउटफिट में दोस्तों के साथ ‘मर्ॉ्िनग वॉक’ करती नजर आएगी।

छोटी सी उमर म परणाई रे बाबोसा, कर्या थारो कांई म कसूर..गाने के साथ जब आनंदी (अविका) जगदीस्या (अविनाश) की पति पत्नी कम दोस्त होने का ज्यादा अहसास करवाते हैं। इस सीरियल के पात्रों को इस तरह से गढ़ा गया कि लगभग 50 एपिसोड होते होते ये दर्शकों के दिलों में उतर गए। इस सीरियल की हाई टीआरपी ने जयपुर के कलाकारों और कला की टीआरपी को ऊंचा कर दिया है।

सीरियल के स्क्रिप्ट राइटर पूर्ण्ेदू शेखर के अलावा मुख्य भूमिका निभा रहे स्मिता बंसल, अनूप सोनी और चैतन्य भी जयपुर के हैं। दरअसल इस सीरियल से जुड़े लोगों का कहना है कि इसकी सफलता का राज इसके इमोशंस के साथ इसमें मौजूद रिलेटिविटी फैक्टर हैं।

सीरियल को देख पुरानी पीढ़ी को अपना जमाना याद जाता है जब बाल विवाह आम बात थी। आज के दौर के पेरेंट्स की बात करें तो वे आनंदी में कहीं ना कहीं अपनी बेटी से रिलेट करते हैं। इसे देखने वाले बच्चों के लिए बाल विवाह किसी खेल से कम नहीं है।

1992 की स्टोरी 2008 में

मैंने दरअसल यह कहानी दूरदर्शन के लिए लिखी थी। यह सपना साकार नहीं हो पाया। यह कहना है सीरियल के स्क्रिप्ट राइटर पूर्ण्ेदू शेखर का। इसके बाद जब कॉमर्शियल चैनल्स आए तो उनके मिजाज को देखकर यह कहानी सुनाने का दुस्साहन मैं कर नहीं सका। जीटीवी की कलीग

ने जब कलर्स चैनल जॉइन किया तो उसने मुझसे कुछ अलग कहानी की डिमांड की। मैंने मजाक में उसे चाइल्ड मैरिज पर सीरियल बनाने के लिए कहा। उसने हां कर दी। आज यह सबके सामने हैं। इस तरह से मेरा सपना पूरा होने में करीब 16 साल लग गए। आखिर में बाल विवाह के बारे में स्लोगंस लिखे आते हैं वे मेरे पिताजी मेघराज श्रीमाली के लिखे हैं।

छोटे शहंशाह भी हुए कायल

जयपुर के स्क्रिप्ट राइटर की यह कहानी बॉलीवुड के सितारों को भी खींचने में कामयाब रही। यह इसकी दोहरी सफलता को दिखाता है। यही वजह है कि बॉलीवुड के शहंशाह के बेटे अभिषेक बच्चन का ड्रीम प्रोजेक्ट द्रोणा के प्रमोशन के लिए इन बाल सितारों अविका और अविनाश का सहारा लेना पड़ा। वहीं अनुपम खेर के प्रोजेक्ट इन बाल कलाकारों को मर्ॉ्िनग वॉक करवाने जा रहे हैं। यह इस बात की ओर से जरूर इशारा करता है कि फ्यूचर के ये स्टार्स हैं।

राजस्थान का नाम हो रोशन

राजस्थानी पृष्ठभूमि पर बना सीरियल राजस्थानी संस्कृति की झलक पेश करता है। हालांकि, कुछ लोगों मानते हैं, यह सीरियल राजस्थान की गलग ब्रांडिंग कर रहा है जो हमारे लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसका जवाब में स्क्रिप्ट राइटर पूर्ण्ेदू कहते हैं, ऐसा नहीं है कि बाल विवाह की कुरीति सिर्फ राजस्थान में ही है। यह तो मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश सहित कई प्रदेशों में है।

मैं यहां का हूं इसलिए यहां की पृष्ठभूमि को लेना लाजिमी है। मैं सच्चई पेश करना चाहता हूं, ना कि यहां की इमेज खराब करना चाहता हूं। इस सीरियल को देख अगर एक व्यक्ति भी बाल विवाह के विरुद्ध हुआ तो हमारे लिए यह सफलता बहुत महत्वपूर्ण होगी। बालिका वधू के बारे में जयपुर के कलाकार अनूप सोनी, स्मिता बंसल और चैतन्य कहते हैं, हमें खुशी है कि हम राजस्थान के कलाकार होने के नाते इस सफलतम सीरियल से जुड़े हैं। यह हमारे करिअर को ऊंचाई दे या ना दे मगर हम सब राजस्थानवासियों का गौरव जरूर बढ़ाएगा।

कम उम्र की आनन्दी और जगदीस्या की नोक-झोंक देखने में काफी रोचक लगती है। इस सीरियल में राजस्थान में पांव पसारे बाल विवाह की हकीकत पेश की गई है।

-हिना चतुर्वेदी, स्टूडेंट

जब आनन्दी पहली बार अपने ससुराल आती है और उसकी सास सुमित्रा आनन्दी को अपने पास सुलाती है। ये मुझे सबसे बेहतरीन सीन लगा।-गीताजंली सिंह, स्टूडेंट

मुझे उस सीन पर सबसे ज्यादा रोना आया जब दादी ने उसे कमरे में बंद कर दिया और उसे दिन भर खाने को नहीं दिया।

-रागेश्वरी पनिया, स्टूडेंट

ये सीरियल एकता कपूर की सास बहू जैसा नहीं है जिसमें सास बहू की लड़ाई हो। ये और सीरियल से बिल्कुल अलग है।

-वीनिता सिंह, हाउस वाइफ





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vipin dubey
Saturday, 4th Oct 2008, 10:16
balika vadu ek behatiren serial hai , iske lekhak jo hai unka udheshay poora hoga jarur , me duaa karta hu. aur me ye bhi kekhana chahata hu aur bhi chhneal hai unme jo bhi serial aa rahe hai wo bhauthi bekar hai usme jo essriya, jalan , ego, bas yhi aur kya hai kuch nahi , jo ghar me darar , aur ko todate hai jodaate nahi , ye galat hai , me sabhi lekhako se ye hi kahua hi essa serial na banawe aur naa hi dekhawe. jo banaye sabki heet me ho .