नई दिल्ली. यूनिवर्सिटी व कॉलेज शिक्षकों के वेतनमानों की समीक्षा के लिए गठित प्रो. जीके चड्ढा कमेटी ने इन शिक्षकों का वेतन 70 से 90 फीसदी बढ़ाने की सिफारिश की है। इन सिफारिशों पर अमल हुआ तो कनिष्ठ व्याख्याता का वेतन 22 हजार रुपए से बढ़कर 40 हजार रुपए मासिक तक पहुंच जाएगा। इसी तरह कुलपति का वेतन 80 हजार तथा पीएचडी डिग्रीधारी व्याख्याताओं का वेतन आईएएस अफसरों से भी करीब छह हजार रुपए अधिक होगा।
उच्च शिक्षा अनुदान आयोग (यूजीसी) को शुक्रवार को पेश की गई इस रिपोर्ट में कमेटी ने शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष करने की सिफारिश की है। इसे सेवावृद्धि कर 70 वर्ष तक किया जा सकता है। सिफारिशों में लाइब्रेरियनों, शारीरिक शिक्षा संस्थानों के डायरेक्टरों और कॉलेज व यूनिवर्सिटी के दूसरे स्टाफ को भी शामिल किया गया है। यूजीसी जांच करने के बाद इस रिपोर्ट को मानव संसाधन मंत्रालय (एमएचआरडी) के पास भेजेगा, जो इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष पेश करेगा।
यह केंद्रीय वेतन पैकेज यूजीसी से मान्यता प्राप्त सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लागू होगा। राज्य सरकारों से संबद्ध कॉलेज भी इसी के समकक्ष वेतन पैकेज दे सकते हैं।
शिक्षकों के तीन नए पद
कमेटी ने शिक्षकों के लिए तीन नए पदों सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर, सीनियर प्रोफेसर और प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस सृजित करने की सिफारिश की है। पीएचडी होल्डर्स के लिए 5 अग्रिम वेतनवृद्धि: रिपोर्ट में पीएचडी डिग्रीधारियों के लिए नियुक्ति के समय मौजूदा चार के बजाय पांच और एम फिल डिग्रीधारियों के लिए मौजूदा दो के बजाय तीन अग्रिम वेतनवृद्धि देने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट की अन्य खास सिफारिशें
>> पोस्ट ग्रेजुएट कोर्र्सो के लिए कॉलेजों में प्रोफेसर और सीनियर रीडरों के पद निर्मित किए जाएं।
>> असाधारण शिक्षक के लिए अलग से एक पद ‘प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस’ बनाया जाए।
