भोपाल. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा कराई जा रही बीई की प्रवेश प्रक्रिया में दूसरे चरण की काउंसिलिंग पर असमंजस की स्थिति बन गई है। ऐसा हाईकोर्ट द्वारा प्रवेश निरस्त करवाने के मामले में लगाई गई रोक के बाद हो रहा है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने कानूनी सलाह लेने कोर्ट के फैसले की प्रति विधि विभाग को सौंपी है।
बीई की दूसरे चरण की काउंसिलिंग के पहले हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से काउंसिलिंग ही उलझकर रह गई है। यही वजह है कि अभी तक काउंसिलिंग की तिथि घोषित नहीं हो पाई है। इसमें खाली रह र्गई करीब छह हजार सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने गत 26 सितंबर को एक बार प्रवेश ले चुकने वाले छात्रों को दोबारा काउंसिलिंग में शामिल करने पर रोक लगा दी है। इस फैसले से करीब दो हजार छात्रों का साल खराब होने की स्थिति बन गई है। यह सभी ऐसे छात्र हैं, जो 26 सितंबर के पहले ही प्रवेश निरस्त करवा चुके थे। इनमें से ज्यादातर छात्रों ने दूसरी काउंसिलिंग के माध्यम से अन्य कॉलेजों में अच्छी ब्रांच पर प्रवेश लेने पहले लिया गया प्रवेश निरस्त करवाया था।
उलझन में आरजीपीवी
आरजीपीवी की काउंसिलिंग प्राधिकरण कोर्ट के इस फैसले से उलझन में आ गई है। दरअसल राज्य सरकार द्वारा बनाए गए प्रवेश अधिनियम में भी तय समय सीमा में प्रवेश निरस्त करवाकर दोबारा काउंसिलिंग में शामिल होने की अनुमति दी गई है। इसका उल्लेख पीईटी की नियम पुस्तिका में भी है। जाहिर है ऐसे में कोर्ट का उक्त फैसला सरकार के नियमों के खिलाफ है। अब सरकार इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने पर विचार कर रही है। दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया के चलते काउंसिलिंग में देरी होने की संभावना भी बन रही है।
ऐसे में छात्रों को अंतिम फैसला आने तक स्वयं की रिस्क पर दूसरी काउंसिलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि विधि विभाग भी इसी दिशा में विकल्प तलाश रहा है। छात्रों को कोर्ट के अंतिम फैसले के अनुसार प्रवेश निरस्त होने की स्थिति को मान्य करने के लिए कहा जा सकता है।
छात्र कर सकते हैं अपील
जानकार इस मामले का एक और रास्ता सुझा रहे हैं। इसमें कोर्ट के फैसले के पहले प्रवेश निरस्त करवा चुके छात्रों को काउंसिंिलंग में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस विकल्प को लागू करने कोर्ट की अनुमति की आवश्यकता होगी जो छात्रों द्वारा अपील करने पर ही मिल सकती है।
छात्रों को होगा नुकसान
काउंसिलिंग में दोबारा शामिल होने वाले छात्रों की वजह से ऐसे छात्रों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिन्हें अब कुछ अच्छे कॉलेजों में सीटें मिलने की उम्मीद है। दरअसल कुछ कॉलेजों की सीटें बढ़ने से दूसरी काउंसिलिंग में शामिल होने वाले छात्रों को मनपसंद सीट मिल सकती है, लेकिन दोबारा शामिल होने वाले छात्रों की वजह से पहली बार शामिल हो रहे छात्रों के हाथ से यह मौका निकल सकता है। क्योंकि मेरिट के अनुसार ऐसे छात्रों की बारी बाद में आएगी।