इंदौर. शुक्रवार शाम पांच बजे देवास की तरफ से इंदौर आ रही टवेरा को मांगलिया बायपास पर रांग साइड घुसे गिट्टी से भरे डंपर ने टक्कर मार दी। इससे टवेरा में सवार आठ लोगों में वीरेंद्र रावत की मौके पर ही मौत हो गई। वह ग्वालियर से सगाई कर लौट रहा था।
घायलों को अस्पताल ले जाया गया जहां कार ड्राइवर पुष्पेंद्र पिता रमेशचंद्र निवासी स्कीम नंबर 78 व एक अन्य युवक भिंड निवासी रिंकू भदौरिया ने भी दम तोड़ दिया।
सात घायलों को एमवाय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। परिजन अस्पताल पहुंचे तब मृतक की शिनाख्त वीरेंद्र पिता दद्दूराम रावत (30) निवासी स्कीम नं. 54 के रूप में हुई।
घायलों में धर्मेद्र पिता हरप्रसाद रावत (21) निवासी चित्रानगर (पटेलबाग कॉलोनी), सत्तू पिता जगदीश भोई (30) निवासी माधवनगर, अशोक पिता गिरवरसिंह (30) निवासी इंदौर, पप्पू जायसवाल (35) निवासी जगजीवनराम नगर तथा एक अन्य की सूरजसिंह (25) के रूप में हुई।
समय पर इलाज मिल जाता तो बच सकती थी दो जानें
एमवायएच में पहले पुष्पेंद्र फिर रिंकू ने भी दम तोड़ दिया। घायलों के साथ पहुंचे लोगों ने दोनों की मौत के लिए इलाज में देरी को जिम्मेदार ठहराया। ब्रजेश सिहोरे ने बताया पुष्पेंद्र और रिंकू को डॉक्टर आईसीयू में नहीं ले गए थे। वे बाहर ही तड़पते रहे जिससे उनकी मौत हो गई। उन्हें अगर गंभीरता से देख लिया जाता तो जान बचाई जा सकती थी।
सगाई के लिए ले गया था दोस्तों को
वीरेंद्र मूल रूप से ग्वालियर के डबरा का रहने वाला था। उसके बड़े भाई हेमप्रकाश व भाभी सीमा शादी के बाद दो साल पहले इंदौर आ गए थे। काम की तलाश में वीरेंद्र भी इंदौर आकर उनके साथ रहने लगा और शराब की एक दुकान पर नौकरी कर ली।
2 अक्टूबर को उसकी सगाई थी। इसके लिए वह दोस्तों व रिश्तेदार धर्मेद्र तथा रिंकू के साथ टवेरा किराए पर लेकर 1 अक्टूबर को घर निकल गया था। सगाई के बाद वे इंदौर लौट रहे थे। दोस्त ब्रजेश ने बताया वीरेंद्र बड़े ही हंसमुख स्वभाव का था। उसने ब्रजेश को भी सगाई में ले जाने की जिद की थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं जा सका। उसके बड़े भाई गांव में ही थे। हादसे की जानकारी मिलने के बाद वे इंदौर रवाना हो गए।