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भक्तिमय होता वाई जेन

पानीपत

नन्हें से अभिषेक के मुंह से यह सुनकर कि मैं नवरात्रों के व्रत रखूंगा उसके माता-पिता हैरान हो गए। अब तक लोगों की यह धारणा थी कि व्रत, पूजा-पाठ बुजरुगों का काम है लेकिन यूथ भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इसके पीछे एक तो युवाओं का भगवान में बढ़ता विश्वास व दूसरों की देखा-देखी भी हो सकती है।

नई पीढ़ी की ई-पूजा

हमारे ऋषि-महर्षि पहाड़ों पर जाकर तप किया करते थे फिर समय आया जब पहाड़ों का स्थान मंदिरों ने ले लिया। लोग मंदिरों में जाते थे वहां मत्था टेककर पूजा-पाठ करते थे। अब समय और भी एडवांस हो चला है। इतनी व्यस्त जिंदगी में लोगों का विश्वास तो अटूट है, लेकिन अलग से पूजा का समय निकाल पाना संभव नहीं है। इसलिए कई घरों में तो लोग खासतौर से यूथ टीवी, सीडी प्लेयर चलाकर ही पूजा-पाठ कर लेते हैं। अब तो ज्योत भी रेडीमेड आने लगी है। न तो उसे जलाने का झंझट और न ही तेल-घी का खर्चा।

मान्यताएं बदलीं

बिजी शेड्यूल के साथ नवरात्रों में व्रत रखना थोड़ा मुश्किल सा लगता है इसलिए इसका भी शार्टकट ढूंढ लिया गया है। आजकल लोग दो व्रत रखते हैं वे चाहे शुरू के दो दिन के हों, आखिर के दो दिन, एक शुरू का एक आखिर का या दो लोग मिलकर एक दिन व्रत रख लेते हैं। इससे वे धर्म से भी जुड़े रहते हैं और काम भी प्रभावित नहीं होता।

खाने के लिए नया

फल भी एक लिमिट में खाए जा सकते हैं। अब तो व्रतों में इतनी वैरायटी आ गई हैं कि व्रत के दौरान फलाहार को लेकर कोई दिक्कत ही नहीं है। आजकल तो सेंधा नमक के चिप्स, कुट्टू के आटे की सेवइयां व मखाने ड्राई फ्रू ट मिक्स के इतने आकर्षक पैकेट मार्केट में उपलब्ध हैं, जिन्हें देखकर आप इन्हें इस्तेमाल किए बिना नहीं रह पाएंगे। फिर लगता है क्यों न इन्हें व्रत रखकर ही खाया जाए।

नान वेज व वाइन का त्याग

जब इस बारे में युवाओं से बात की गई तो उनका कहना है कि वे नवरात्रों के दिनों में नॉन वेज छोड़ देते हैं। उनका कहना है कि मां के पवित्र व्रत होते हैं लोग प्याज तक खाना छोड़ देते हैं तो हम नॉन वेज क्यों नहीं। कुछ लोग तो व्रतों के पहले और तुरंत बाद भी नान वेज का इस्तेमाल नहीं करते। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है जहां कोई भी भोजन पचने में ज्यादा से ज्यादा 24 घंटे लगते हैं तो नॉन वेज को पचने में 72 घंटे लगते हैं। लेकिन नवरात्रों के दिनों में ज्यादातर घरों में इसका परहेज रखा जाता है और होना भी चाहिए। इससे साफ जाहिर है कि नॉन वेज इन दिनों वर्जित तो होता ही है साथ ही सभी इसे फालो भी करते हैं।

दुर्गा पूजा पंडाल

कई स्थानों पर सप्तमी, अष्टमी व नवमी वाले तीन दिन गरबा होता है व दुर्गा मां की पूजा के लिए पंडाल सजाए जाते हैं। इसमें सभी पूरी मस्ती से इसे मनाते हैं। इसमें सबसे ज्यादा उत्साहित यूथ होता है। जमकर मस्ती होती है। कई जगहों पर तो लोग एक खाली प्लाट या पार्क में आस-पड़ोस के लोग मिलकर पैसा इकट्ठा करके इसे मनाते हैं। इससे किसी पर अतिरिक्त भार भी नहीं पड़ता व एन्जॉय भी हो जाता है।

- सीमा सिंदवानी,पानीपत/संध्या, करनाल

करनाल की रिया सलुजा कहती हैं कि मन में श्रद्धा होनी चाहिए फिर तरीका पूजा करने का तरीका चाहे जो भी हो। वैसे भी अर्चना में कुछ ही देर तक ध्यान लग पाता है फिर चाहे अर्चना घर में हो या मन्दिर में। सीडी या टीवी पर भजन कीर्तन लगाकर पूजा करना कोई बुरी बात नहीं है। वे खुद भी प्रसाद बनाते समय या तो टीवी पर या भी सीडी पर भजन लगाकर माता को याद करती हैं। इससे एक फायदा यह है कि साथ-साथ काम भी हो जाता है और पूजा भी।

आज जहां इस माडर्न युग में शराब पीना और नॉनवेज खाना लोगों के शौक में शामिल हो गया है। पर बहुत से लोगों ऐसे भी हैं जो इन चीजों के शौक के साथ-साथ अपनी धार्मिक प्रवृत्ति को नहीं भूले। माता के पावन व्रतों के दिनों में इन अपने इस शौक को कहीं न कहीं दबा देते हैं। ऐसा मानना है स्टॉक मार्केट केडीलर नितेश कमल का। वे कहते हैं नवरात्रों के दिनों में माता का धरती पर आवास रहता है ऐसे में इन चीजों को दूर रखना ही जरूरी है। वैसे उन्हें नॉनवेज से कोई परहेज नहीं है, लेकिन नवरात्रों के दिनों में इसका परहेज रखते हैं। अगर थोड़े दिन नॉनवेज का सेवन न किया जाए तो क्या फर्क पड़ता है।





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