भोपाल. पांच लाख रुपए के गबन के मामले में निलंबन के चार हफ्ते बाद ही बहाल कर दिए गए सहायक परियोजना अधिकारी को अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का है।
बहाली के बाद इस अधिकारी डीएन मिश्रा को भोपाल के विकास आयुक्त कार्यालय में पदस्थ किया गया था। जिला पंचायत सीधी में सहायक परियोजना अधिकारी रहे डीएन मिश्रा के खिलाफ कुसुमी थाने में गबन की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। कुसुमी थाना पुलिस ने शुक्रवार को श्री मिश्रा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
पुलिस ने डीएन मिश्रा को शुक्रवार सुबह 10 बजे गिरफ्तार कर जेएमएफसी आरएस गाडिया की कोर्ट में पेश किया। इसकी सूचना शनिवार को भोपाल में विकास आयुक्त कार्यालय को दी गई।
मूलत: जल संसाधन विभाग के मानचित्रकार श्री मिश्रा 30 जून 2007 को प्रतिनियुक्ति पर जिला पंचायत सीधी में सहायक परियोजना अधिकारी पदस्थ थे। उन्हें सात दिसंबर 2007 से 20 मार्च 2008 तक मिली वाटरशेड प्रोजेक्ट में परियोजना अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके खिलाफ पांच लाख 28 हजार रुपए के गबन की एफआईआर कुसुमी थाने में दर्ज कराई गई थी।
निलंबन के चार हफ्ते बाद ही हो गए थे बहाल
दो लाख 68 हजार रुपए के गबन के आरोप में श्री मिश्रा को इस साल मई में निलंबित कर जुलाई में बहाल कर दिया गया था। जिला पंचायत रीवा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने 19 अप्रैल 2008 को संभागायुक्त को दी रिपोर्ट में श्री मिश्रा को दो लाख 68 हजार रुपए स्वयं मंजूर कर और अपने ही हस्ताक्षर से निकालने का दोषी पाया।
इस रिपोर्ट पर संभागायुक्त ने श्री मिश्रा को कदाचरण का दोषी पाया और 28 मई 2008 को उन्हें निलंबित कर दिया। ठीक एक सप्ताह बाद पांच जून को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने श्री मिश्रा की बहाली का प्रस्ताव संभागायुक्त को भेजा। संभागायुक्त ने तीन जुलाई 2008 को श्री मिश्रा की बहाली का आदेश जारी कर दिया। उन्हें विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल में पदस्थ किया गया।
बाद में गबन की रकम पांच लाख 28 हजार रुपए तक जा पहुंची। श्री मिश्रा के खिलाफ कुसुमी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इस निलंबन और बहाली के मामले को लेकर विभाग में चर्चाएं अब तक गर्म हैं कि जिस सीईओ ने प्रथम दृष्टया गबन का दोषी पाकर निलंबन की सिफारिश की, उसी ने निलंबन के एक हफ्ते बाद बहाली की सिफारिश क्यों की थी? विकास आयुक्त कार्यालय के आला अफसरों ने बहाल क्यों किया?