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कम जमीन पर भी कॉलोनियां

भोपाल. विधानसभा चुनाव से ऐन पहले छोटे बिल्डरों को खुश करने के लिए राज्य सरकार कॉलोनी विकसित करने के नियमों को बदलने जा रही है। पहले न्यूनतम आठ और छह हेक्टेयर जमीन पर ही कालोनी विकसित करने का प्रावधान था, जिसे अब घटाकर न्यूनतम सवा एकड़ तक किया जा रहा है, लेकिन कम जमीन पर कालोनी बनाने वाले बिल्डरों को ज्यादा खुली जमीन छोड़ना होगी।

कालोनी विकसित करने के मापदंड बदलने की गरज से पिछले वर्ष लागू की गई आवास नीति में परिवर्तन किया जा रहा है। इस बारे में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेज दिया है, लेकिन उच्चस्तर पर एक राय न बन पाने के कारण इसे अब तक मंत्रिमंडल की बैठक में नहीं लाया जा सका। जानकार सूत्रों ने बताया कि यह मुद्दा कैबिनेट की अगली बैठक में लाए जाने के आसार हैं।

बिल्डर्स एसोसिएशन ने किया था आग्रह :
बताया जाता है कि सरकार ने आवास नीति में भोपाल-इंदौर के लिए न्यूनतम आठ हैक्टेयर और ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन के लिए न्यूनतम छह हैक्टेयर जमीन पर ही आवासीय कालोनी विकसित करने का प्रावधान किया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग से बिल्डर्स एसेासिएशन और अन्य कालोनाइजर्स ने यह आग्रह किया था कि शहरी इलाकों में नगर निगम सीमा के भीतर इतनी अधिक जमीन बहुत कम लोगों के पास है।

इसकी वजह से शहरों में कालोनियों को विकसित करने की गति धीमी हुई है। केवल बड़े बिल्डर्स ही कालोनी विकसित कर पा रहे हैं। छोटे कालोनाइजर जमीन होने के बाद भी कालोनी विकसित नहीं कर पा रहे हैं। सार्वजनिक सुविधाएं मुहैया कराने की गरज से कम एरिया में कालोनी विकसित करने वालों को हतोत्साहित अन्य तरीके से किया जाए, लेकिन विकास की रफ्तार को प्रभावित किए बिना।

खाली जमीन छोड़ने का प्रतिशत 11-15 फीसदी होगा :
बिल्डर्स एसोसिएशन के आग्रह को मान्य करते हुए सरकार ने आवास नीति में परिवर्तन करने का मन बना लिया है। इसके तहत अब बड़े शहरों में कम जमीन पर कालोनी विकसित करने वालों को ज्यादा जमीन खाली छोड़ना पड़ेगी। खाली जमीन छोड़ने का यह प्रतिशत 11 से 15 फीसदी रहेगा। इसके लिए स्लेब बनाया गया है। वैसे भी कालोनी के लिए मौजूदा मापदंड के मुताबिक दस फीसदी जमीन खाली छोड़ना अनिवार्य है। इसकी पुष्टि आवास एवं पर्यावरण विभाग के सूत्रों ने की है।





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