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तालाब में डूबे तीन बच्चे

इंदौर. रविवार सुबह बिजासन माता के दर्शन करने का कहकर घर से निकले पांच बच्चों में से तीन टेकरी पर तालाब में नहाने के दौरान डूब गए। एसएएफ के एक नवआरक्षक ने उन्हें निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन बचाए नहीं जा सके। तीनों का पीएम एडीएम की विशेष अनुमति से रात में हुआ।

चंदननगर ई-सेक्टर के रोहित उर्फ कालू पिता दादू (10), उसका छोटा भाई धरमू (5), अंकित पिता रंधावा (10), शेखर पिता मोहन (10) तथा उसका छोटा भाई प्रद्युम्न (8) सुबह 11 बजे घर से बिजासन माता के दर्शन करने गए। दर्शन करने के बाद टेकरी के तालाब में नहाने चले गए। शेखर व धरमू तो किनारे पर ही नहाकर बैठ गए। बाकी तीनों तैरना नहीं आने के बावजूद खेलते-खेलते गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।

शेखर ने चिल्लाकर टेकरी पर आए लोगों को मदद के लिए पुकारा। इसी दौरान टेकरी पर ड्यूटी कर रहा एसएएफ 34वीं बटालियन, धार का नवआरक्षक धनपाल वर्मा पहुंचा और पानी में कूद पड़ा। उसने एक-एक कर तीनों बच्चों को निकाल लिया लेकिन वे बेसुध हो गए थे।

फिर पुलिस वाहन से जिला अस्पताल भेजा जहां तीनों को मृत घोषित कर दिया। शेखर व धरमू से बमुश्किल पूछा तो पता चला कालू ही सभी को लेकर आया था। पता पूछने पर शेखर सिर्फ इतना बता सका कि चंदननगर में घर है, लेकिन मकान का नंबर नहीं बता सका। इसके बाद चंदननगर पुलिस की मदद से बच्चों को लेकर उनके घर पहुंचा जा सका।

नहीं संभाल सके पिता को
घर पहुंचने पर कालू की बड़ी बहन अंजली ने बताया कालू व अंकित चचेरे भाई थे। दोनों के माता-पिता महूनाका चौराहे पर फलों का ठेला लगाते हैं। उन्हें मोबाइल कर अस्पताल पहुंचने का कहा गया। शेखर व प्रद्युम्न के मां-बाप राजबाड़े पर नींबू बेचते हैं। उन्हें भी किसी प्रकार सूचना दी गई। सबसे पहले कालू के पिता पहुंचे और बेटे व छोटे भाई के पुत्र का शव देख इतने बदहवास हुए कि संभालना मुश्किल पड़ गया।

भास्कर ने किया था अलर्ट
>> 18 मार्च को तालाब की सुरक्षा व आसपास फैली अव्यवस्थाओं को लेकर खबर प्रकाशित की थी। महापौर ने मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की बात भी कही थी।
>> 26 सितंबर को जनकार्य समिति के अध्यक्ष ललित पोरवाल ने सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात किए जाने का कहा था, जिसका पालन नहीं हुआ।

‘भास्कर’ में प्रकाशित खबर में बताया था कि तालाब की देखरेख के लिए निगम की ओर से एक दरोगा और दो सफाई कर्मचारी डच्यूटी है लेकिन वे ज्यादातर समय नदारद ही रहते है। इसके चलते कभी भी वहां कोई भी हादसा घट सकता है लेकिन इसके बावजूद वहां पर सिक्योरिटी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। 26 सितंबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होने से पहले भी तालाब की सुरक्षा और साफ-सफाई के मुद्दे पर प्रशासन से बात की गई थी। उस समय जनकार्य समिति अध्यक्ष ललित पोरवाल ने कहा था तालाब के लिए निरंतर गार्ड को निगरानी रखने को कहेंगे लेकिन फिर भी घटना के वक्त कोई गार्ड तालाब के आसपास मौजूद नहीं था।

सालों पहले बनवाई थी पाल : ‘भास्कर’ ने हाल ही में प्रकाशित खबर में बताया था कि कई साल पहले तालाब के आसपास कच्ची पाल बनवाई गई थी। आसपास पौधारोपण भी किया गया था लेकिन देखरेख के अभाव में वह जर्जर हो गई। तालाब के आसपास का कई हिस्सा कच्च है।

नगरीय विकास संगठन के मुकेश यादव ने बताया ‘भास्कर’ द्वारा मुद्दा उठाने पर ताबड़तोड़ व्यवस्था की गई लेकिन व्यवस्था नाकाफी है। सड़क भी ठीक से नहीं बनाई गई और बगीचे, तालाब के आसपास गंदगी फैली हुई है। हम कलेक्टर, कमीश्नर को इस संबंध में ज्ञापन भी दे चुके हैं। उन्होंने हादसे की निंदा करते हुए कहा यदि निगम प्रशासन मुस्तैद रहता तो यह हादसा नहीं होता।





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