इंदौर. विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार चयन की एक अहम कवायद रविवार को पूरी कर ली गई। दिनभर चली इस प्रक्रिया में पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा और जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा की मौजूदगी में शहर के छह विधानसभा क्षेत्रों के 50 से ज्यादा दावेदारों के लिए करीब 500 कार्यकर्ताओं ने अपनी लिखित राय प्रकट की। रायशुमारी के नतीजे का खुलासा 7 अक्टूबर के बाद भोपाल में होगा। हालांकि पार्टी के ही एक वर्ग ने इसे महज खानापूर्ति करार दिया है।
रायशुमारी की शुरुआत में श्री पटवा तथा श्री मिश्रा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित संगठन है और हम पार्टी कार्यकर्ता के माध्यम से ही प्रत्याशी का चयन करेंगे। इस रायशुमारी से मोटे तौर पर उम्मीदवारों को लेकर कार्यकर्ताओं की राय का खुलासा हो गया। भाजपा की गुटबाजी का असर रायशुमारी में भी देखने को मिला और अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा लोगों की राय प्रकट करवाने के लिए नेताओं के साथ ही दावेदारों ने भी जमकर लाबिंग की।
भारी रही गुटबाजी
गुटबाजी के चलते पार्टी के सभी नेताओं ने रायशुमारी अपने पक्ष में करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी थी लेकिन इस मामले में लोक निर्माण मंत्री का खेमा सब पर भारी पड़ा। इस खेमे की तैयारी का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि रमेश मेंदोला का नाम चार विधानसभा क्षेत्रों से उम्मीदवारी के लिए आगे आया। इंदौर 3 तथा इंदौर 5 से वे सशक्त दावेदार के रूप में उभरे, इंदौर 2 में उन्हें लोनिवि मंत्री का विकल्प रखा गया जबकि इंदौर 1 से कई लोगों ने उन्हें उम्मीदवार बनाने की बात आगे बढ़ाई। इंदौर चार के मामले में इस खेमे मे अपना रूख स्पष्ट नहीं किया। हालांकि यहां उनके शंकर लालवानी को मदद करने की चर्चा है। राऊ में श्री विजयवर्गीय ने मधु वर्मा की मदद की जबकि कैलाश पाटीदार को दूसरी पसंद पर रखा।
नेता नदारद रहे
सांसद सुमित्रा महाजन, लोनिवि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, भंवरसिंह शेखावत, सत्यनारायण सत्तन तथा गोपीकृष्ण नेमा दूसरे जिलों की रायशुमारी में व्यस्त होने के कारण अपने से जुड़े क्षेत्रों में राय नहीं दे पाए।
कई नए नाम भी आए सामने
चौंकाने वाला हो सकता है नतीजा यहां की रायशुमारी में अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही उषा ठाकुर ने नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता को बराबरी की टक्कर दी। महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा तथा सत्यनारायण सत्तन के नाम भी अलग-अलग वर्गो से आगे आए और ऐनवक्त पर राजेंद्र शुक्ला ने समर्थकों से नाम आगे बढ़वाकर सबको चौंकाया। यहां विजयवर्गीय खेमे की लामबंदी के चलते श्री मेंदोला का नाम भी कई लोगों ने आगे बढ़ाया।
विकल्प श्रीमती विजयवर्गीय को रखा
यहां से कैलाश विजयवर्गीय का टिकट तय माना जा रहा है। बावजूद रायशुमारी में इस खेमे की ओर से श्री विजयवर्गीय के साथ ही उनकी पत्नी आशा विजयवर्गीय तथा रमेश मेंदोला का नाम दूसरी व तीसरी वरीयता में आगे बढ़ाया।
ताई व गोपी नेमा के बीच गठबंधन
इंदौर तीन के मामले में सांसद सुमित्रा महाजन तथा पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा के बीच गठबंधन हो गया था। इसी का नतीजा था कि दोनों खेमों से जुड़े लोगों ने श्री नेमा, सांसद के बेटे मंदार महाजन व शशि खंडेलवाल का नाम आगे बढ़ाया। विजयवर्गीय खेमे ने यहां से श्री मेंदोला, हरीश डागूर तथा दिनेश वर्मा के नाम प्रथम, द्वितीय व तृतीय वरीयता में दिए। कुछ लोगों की राय ललित पोरवाल व पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता गोविंद मालू के पक्ष में भी रही। यहां मुकाबला श्री नेमा व श्री मेंदोला के बीच ही लग रहा है।
चार नंबर में मामला कांटाजोड़
प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके इंदौर चार विधानसभा क्षेत्र में चार नेताओं के बीच ही मामला सिमटता नजर आया। दिवंगत लक्ष्मणसिंह गौड़ की पत्नी मालिनी गौड़ व पार्टी के नगर अध्यक्ष सुदर्शन गुप्ता को अच्छा प्रतिसाद मिला। सभापति शंकर लालवानी का असर देखने को मिला। एक वर्ग ने कृष्णमुरारी मोघे, विजय मलानी व अंजू माखीजा का नाम बढ़ाया जबकि गौड़ खेमे से बगावत करने वाले कैलाश शर्मा का दायरा सीमित रहा। श्रीमती गौड़ की मदद सांसद महाजन ने की। इसका नतीजा था कि प्रथम वरीयता के वोट की दूसरी पसंद श्रीमती माखीजा रहीं। दूसरी पसंद में गोविंद मालू, शंकर यादव व जवाहर मंगवानी के नाम उभरे।
तगड़ी घेराबंदी की थी हार्डिया की
विधायक महेंद्र हार्डिया का किला तोड़ने में लोनिवि मंत्री के खेमे ने कोई कसर नहीं छोड़ी। श्री हार्डिया को सुमित्रा महाजन ने मदद की। दोनों के खेमों से श्री हार्डिया व श्रीमती माखीजा के नाम आगे आए जबकि तीसरी वरीयता समीर चिटनीस को दी गई। विधानसभा-2 के पांच वार्ड इस क्षेत्र में मिलने के बाद यहां मजबूत हुए विजयवर्गीय खेमे ने तय रणनीति में श्री मेंदोला, कल्याण देवांग व आलोक डाबर का नाम बढ़ाया। कुछ लोगों की पसंद अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सेम पावरी भी रहे।
गांव बनाम शहर का मामला हो गया
क्षेत्र में ग्रामीण नेताओं कैलाश पाटीदार, दिनेश मल्हार, सोमेश्वर पटेल, ओमप्रकाश यादव ने अपने पक्ष में तो राय प्रकट करवाई साथ ही नेतृत्व तक यह संदेश भी भिजवा दिया कि टिकट हमारे बीच से ही दें। इसके बावजूद प्राधिकरण अध्यक्ष मधु वर्मा अन्य नामों पर भारी दिखे। कुछ लोगों की पसंद भंवरसिंह शेखावत तथा पार्टी के नगर उपाध्यक्ष संतोष वर्मा भी रहे।