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मेहंदी ते वावी मां मेवाड़ मा..

जयपुर. garba जिंदगी का ताना बाना मानो संगीत से ही बना हो। कुछ ऐसा ही अहसास एसएमएस इंवेस्टमेंट ग्राउंड में चल रहे एयरटेल अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव में आए लोगों को संगीत की धुन पर झूमते नाचते और गुनगुनाते देख लग रहा था।

दो सर्किल में नाचते गरबा के दीवाने लाइव ऑर्केस्ट्रा पर पारम्परिक गुजराती गरबा गीतों के साथ गरबा की बीट्स पर पिरोए गए फिल्मी गीतों पर झूम रहे थे तो बड़ी संख्या में महोत्सव में शिरकत करने आए लोग उनको देख रश्क कर रहे थे कि वह क्यों गरबा के गीतों पर थिरकने का मौका चूक रहे हैं। पारम्परिक गरबा परिधान में आए जयपुराइट्स के कदम रुक नहीं रहे थे और वह बीट के साथ कदमताल करते नजर आ रहे थे।

पूरा गरबा स्थली में गूंजता म्यूजिक और ड्रम की थाप गरबा करने वालों के जोश को बढ़ा रहे थे। भोपाल से आए म्यूजिकल ग्रुप के गीतों पर अभिव्यक्ति सर्किल पर डांडिया खनकाते हुए पारम्परिक अंदाज में स्टेप्स कर रहे थे तो वहीं आम लोगों के सर्किल में गरबा डांडिया को आनंद ले रहे लोग गरबा के स्टेप्स की बंदिशों से मुक्त हो अपनी ही मस्ती में झूम रहे थे। एअरटेल अभिव्यक्ति गरबा महोत्सव के सहप्रायोजक हैं दावत बासमती राइस। पेप्सी, बिंगो, सरस, डॉ. कैफे रेस्टोरेंट और ईएमआरआई 108 भी महोत्सव में सहयोगी हैं।

गुजराती गीतों की बहार
देव देव पाणि.., जैसे स्लो रिदम के पारम्परिक गीत गरबा डांडिया के जोश को परवान चढ़ा रहे थे। गुजराती गीत भले ही सबकी समझ में न आते हों लेकिन इनकी रिदम पर झूमने का मजा राजस्थानी गीतों से कम नहीं है।

सोनालो गरबो अम्बे मां चलो..
सोने का कलश सिर पर रखकर धीमें चलो कहीं गिर न जाए। इस गाने का ये मतलब बहुत कम लोग समझ पाते हैं। धीरे धीरे कदमों को आगे बढ़ाते हुए लोग इस गाने पर झूमते नजर आते हैं।

मेहंदी ते वावी मां मेवाड़ मा..
भले ही गुजरात का गरबा जयपुर के लोगों को भा रहा है। लेकिन मेवाड़ की मेहंदी का रंग गुजरात पर छा रहा है। ‘मेहंदी ते वावी मां’ यह गाना भले ही गुजराती है, लेकिन इसकी पंक्तियों में राजस्थानी रंग छुपा है। इन पंक्तियों के जरिए कहा गया है कि मेहंदी तो मेवाड़ की है लेकिन इसका रंग गुजरात तक पहुंच चुका है।

कंज्यूमर से जुड़ने का प्लेटफॉर्म
गरबा महोत्सव से जुड़े प्रायोजक और सहयोगी कम्पनियों के लिए ये कंज्यूमर से जुड़ने का एक बेहतरीन प्लेटफ ॉर्म है। एयरटेल राजस्थान के मार्केटिंग हैड आर. सुंदर ने बताया कि इस महोत्सव के जरिए कंज्यूमर से कनेक्ट होने का मौका मिलता है। वहीं इस महोत्सव से पहली बार जुड़े दावत बासमती के एएचएम शिवकुमार कहते हैं कि यहां प्रोडक्ट डिसप्ले करने से कंज्यूमर के दिमाग पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है।





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