जसवंतपुरा/भीनमाल (जालोर). प्रसिद्ध धार्मिक स्थल सुंधा माता पर्वत पर स्थित रोप-वे में रविवार को तकनीकी खराबी के कारण 9 ट्रॉलियों में सवार 32 श्रद्धालु करीब पांच घंटे तक 100 फीट की ऊंचाई पर फंसे रहे। बाद में रोप-वे कर्मियों एवं पुलिस-प्रशासन ने रेस्क्यू टीम की सहायता से उन्हें नीचे उतारा।
सवेरे पौने ग्यारह बजे सुंधा माता पर्वत पर स्थित रोप-वे की १6 ट्रॉलियों में से 9 ट्रॉलियां अचानक रुक गई। जिससे ट्रॉलियों में सवार ३२ श्रद्धालु अटक गए। जिनमें १२ महिलाएं, १४ पुरूष और ६ बच्चे शामिल थे। रोप-वे कर्मचारियों ने करीब 15 मिनट तक खराबी को दुरुस्त करने के लिए प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद रोप-वे मैनेजर ने प्रशासन को सूचना दी। पुलिस और रेस्क्यू टीम की सहायता से करीब पौने चार बजे सभी श्रद्धालुओं को सकुशल नीचे उतार लिया गया।
पानी को भी तरसे
रविवार को सवेरे पौने ग्यारह बजे रोप वे के गियर बॉक्स का पहिया अचानक खराब हो गया जिससे ९ ट्रालियां जहां की तहां रुक गई। ट्राली में फंसने के बाद श्रद्धालुओं की सांसे तक अटकी रही। ये लोग लगातार बचाने की गुहार लगाते रहे। इस दौरान बच्चों का तो और भी बुरा हाल था। हालत यह थी कि पांच घंटे तक फंसे इन लोगों को कहीं से पानी भी नहीं पहुंचाया जा सका।
अग्रिम आदेश तक रोक
प्रशासन ने अग्रिम आदेश तक रोप के संचालन पर रोक लगा दी है। कलेक्टर रोहित कुमार ने बताया कि रोप वे के संचालन पर बहरहाल रोक लगा दी है। इस दौरान इसकी उच्च तकनीकी अधिकारियों द्वारा जांच की जाएगी।
आमेर के शिला माता मंदिर में भगदड़ की नौबत
जयपुर. आमेर के शिला माता मंदिर में रविवार सुबह छठ के मेले के दौरान भगदड़ होते-होते बची और जोधपुर जैसा हादसा टल गया। धक्का-मुक्की से एक बालिका और उसकी मां दब गई। बेहोश बालिका को एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मंदिर क्षेत्र में पुलिस के साथ ही निजी सुरक्षाकर्मी भी तैनात थे, लेकिन सुबह 5:30 बजे अचानक शुरू हुई धक्का-मुक्की को रोकने वाला कोई नहीं था। कुछ स्थानीय लोग व्यवस्था बनाने में लगे हुए थे। सुबह होने तक मंदिर परिसर से लेकर महल के निचले हिस्से तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई थी।
सुबह श्रद्धालुओं के जत्थे के जत्थे पहुंचे तो भीड़ और बढ़ गई। पट खुलने से पहले गेट के पास एक जत्थे में शामिल कुछ युवकों ने धक्का-मुक्की शुरू कर दी। इससे आगे खड़ी युवतियां, महिलाएं और बच्चे गिरने लगे।
मानसरोवर सेक्टर 61 निवासी ममता, उसकी बेटी दिव्या (10) और पांच माह का बच्च भी नीचे गिर गया। बालिका को उसकी मां ने उसे उठाने की कोशिश की तो पीछे से धक्का लगा और वह भी गिर गई। दो-तीन लोग और गिर गए। वहां मौजूद पुलिस के जवानों ने बालिका को उठाया और लोगों ने पांच महीने के शिशु को बाहर निकाला। बालिका श्रद्धालुओं के पैरों तले कुचलने से अचेत हो गई। उसे अस्पताल पहुंचाया गया।
बाद में चेता प्रशासन : बालिका के अचेत होने के बाद जिला प्रशासन सतर्क हुआ। मंदिर परिसर खाली होने के बाद ही प्रवेश दिया जाने लगा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जत्थे में लोगों की संख्या कम कर दी गई। वन वे ट्रेफिक किया गया। दो एंबुलेंस, दमकल की गाड़ियों को वहां तैनात कर दिया।
आमेर के एसडीओ बलबीर सिंह का कहना था कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। महल में धक्का-मुक्की व भगदड़ जैसे कोई हालात नहीं थे। मंदिर के गेट के पास एक लड़की फिसल गई थी, जिसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।
सरकारी डिस्पेंसरी से डॉक्टर नदारद : हाल ही शुरू हुई आमेर की सरकारी डिस्पेंसरी में डॉक्टर, नर्स, कंपाउंडर, प्राथमिक उपचार की दवाइयां, इंजेक्शन आदि का इंतजाम नहीं थे। बेहोश बालिका को डिस्पेंसरी में ले जाया गया तो डॉक्टर नहीं मिला। कंपाउंडर ने फोन किया तो उसने दस बजे आने के लिए कहा। काफी अनुरोध करने व वस्तुस्थिति बताने पर वह आधे घंटे में डिस्पेंसरी पहुंचा। इस बीच बालिका का शरीर काला पड़ने लगा।
डिस्पेंसरी में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। उसे गंभीर हालत में एमएमएस अस्पताल के पोलीट्रोमा वार्ड में भर्ती कराया गया। ऑक्सीजन देने व ड्रिप लगाने के बाद बालिका की हालत सामान्य हुई।
वही वक्त
अवसर छठ के मेले का था। जोधपुर के चामुंडा माता मंदिर की तरह शिला माता मंदिर में भी तड़के से ही श्रद्धालु जुटना शुरू हो गए। करीब साढ़े पांच बजे दर्शनार्थियों में धक्का-मुक्की शुरू हो गई। एक महिला और उसके दो बच्चे गिरकर घायल हो गए।
उतनी ही भीड़
भीड़ का आलम यह था कि मंदिर परिसर से लेकर महल के निचले हिस्से तक लंबी कतार लग गई। यहां भी महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारें नहीं थीं। हर कोई पहले माता के दर्शन करने की जल्दी में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा था।
‘वैसे’ ही इंतजाम
इतनी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बंदोबस्त पर्याप्त संख्या में नहीं था। मौके पर प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं थी। एंबुलेंस थी लेकिन ड्राइवर नहीं था। बेहोश बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाया गया तो वहां डॉक्टर ही नहीं था।
..बस बच गया जयपुर
शिला माता की कृपा रही कि जयपुर शहर जोधपुर जैसे हादसे से बच गया। रविवार तड़के धक्का-मुक्की के बाद जैसे ही स्थिति सामान्य हुई, मंदिर में उमड़े श्रद्धालु फिर से शिला माता के जयकारे लगाते हुए दर्शनों के लिए चल पड़े।