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गरीबों को भूखंड बांटेगी सरकार

जयपुर. राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को जमीनें बांटने का फैसला किया है। इसके तहत राज्य के सभी शहरों में स्थानीय निकायों के माध्यम से निम्न वर्ग के लोगों को आरिक्षत दर की 25 फीसदी राशि पर 45 वर्गमीटर के भूखंड दिए जाएंगे। इनकी राशि भी चार समान किस्तों में ली जाएगी।

इस संबंध में नगरीय विकास विभाग ने दो दिन पहले ही सभी स्थानीय निकायों को अपने-अपने यहां इस तरह की योजनाएं बनाने के आदेश दिए हैं। इन निकायों से यह भी कहा गया है कि वे योजना बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि पात्र लोगों को उनके कार्यस्थल के आसपास ही भूखंड मिल जाए, जिससे उन्हें काम पर जाने के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़े।

नगरीय विकास विभाग ने जयपुर विकास प्राधिकरण को जयपुर में ऐसे लोगों के लिए शहर के आसपास ही 8 से 10 कालोनियां विकसित करने को कहा है। भूखंडों पर निर्माण के लिए राज्य स्तर पर मानचित्र अनुमोदन किया जाएगा। इसके अनुसार ही भूखंडधारी को आवास बनाना होगा। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बनने वाली कालोनियों में सड़क, पानी, बिजली और सीवरेज आदि की व्यवस्थाएं होंगी। ये सुविधाएं स्थानीय निकाय अपने खर्चे पर विकसित करेंगे।

ऐसे मिलेंगे भूखंड
>> आवेदक की आय 4 हजार रुपए मासिक अथवा 48000 हजार रुपए सालाना होनी चाहिए।
>> जहां भूखंड लेना चाहते हैं, उस शहर में कम से कम 10 साल से रह रहे हों।
>> वार्षिक आय के संबंध में शपथ-पत्र देना अनिवार्य होगा।
>> घरेलू नौकर, दुकान या मंडी समिति में काम करने वालों के बारे में नियोक्ता से सत्यापन कराना होगा।
>> सरकारी एजेंसियों, कृषि उपज मंडी समिति, नगरपालिकाएं आदि से भी सत्यापन कराया जाएगा।
>> आवेदक भूखंड को 10 साल तक बेच नहीं सकेंगे।

चुनावी जमीन पर वोटों के प्लाट

इस योजना को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा निम्न वर्ग के मतदाताओं को लुभाने की है। यह वर्ग मुख्य रूप से कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है। अब भूखंड देने से यह वोट बैंक भाजपा के पक्ष में आ जाएगा।

इससे पहले सरकार ने बीपीएल, अनुसूचित जाति, जनजाति, लघु एवं सीमांत किसान परिवार की महिलाओं के नाम बैंक में खाता खुलवाने पर भामाशाह वित्तीय सशक्तिकरण एवं नारी समृद्ध् योजना के तहत 1500 रु. देने की योजना लागू की थी।

चुनाव के ऐनवक्त पर ही क्यों : यह योजना सरकार ने जुलाई 2008 में ही बनाई थी। इसे चुनाव के ऐनवक्त पर लागू करने का मतलब यह है कि आदमी भूखंड जैसी चीज को कभी नहीं भूलता और वोट के समय वह भाजपा को भी नहीं भूले।





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Ankita Sharma
Monday, 6th Oct 2008, 15:00
Mai yaha apne vicharo ko garibo ke hit me vyaktt karna chati hoo.Govt. ko poor persons ke liye kuch karna chaiye jaise ki unki education and economicaly condition ke liye or ye baat bhi me janti hoo ki Govt. many plans chalati hai but un yojanao ka pura adventure garibo ko nahi mil pata kyo ki plans ya to puri tarah open nahi ho pate ya maximum plans only Obc, Stsc, ke liye hote hai isliye unka pura labh poors ke sath rich persons bhi utha lete hai or poors apni garibi door karne ke liye source nahi hai,isliye ye plans sirf zati[cast] ke base pe na hokar sirf poors ke liye hona chaiye taki poors apni life ko age badane ki kosis kare or desh se poverty dur ho sake or desh age bad sake. Desh ka har baccha Oualified ho lakin ye tab ho sakta hai jab uski financial problem dur ho sake, koi bhi plan zati ke base pe na hokar sirf poors ke liye ho jis se ki zatibad bhi mit sake.