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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. राज्य के मैदानी इलाकों में दो लाख हेक्टेयर से ज्यादा की फसल बरबाद हो चुकी है। धान के पौधों में झुलसा रोग के अलावा शीत ब्लाइट का प्रकोप है। रायपुर जिले में ही आरंग, मंदिरहसौद, तिल्दा और भाटापारा ब्लाक के करीब 100 गांवों की खेती इससे प्रभावित है। इन गांवों में कहीं-कहीं गंगई और कटुवा की भी शिकायतें हैं।
जिलों के कृषि अफसरों से मिले आकड़ों के मुताबिक मैदानी इलाकों में रायपुर, महासमुंद, कवर्धा, राजनांदगांव और कांकेर के कुछ हिस्से में धान में बीमारियों की शिकायतें हैं।
रायपुर जिले में कम बारिश की वजह से पहले ही 32 हजार हेक्टेयर की फसल बरबाद हो चुकी थी और अब करीब 45 हजार हेक्टेयर में बीमारी फैल चुकी है। झुलसा रोग ने धान की पत्तियों को झुलसा दिया है। लंबी अवधि वाली फसलों में यह बीमारी देखी गई है। हरहुना धान में कटुआ और तनाछेदक का प्रकोप बताया जा रहा है।
कांकेर जिले का कुछ हिस्सा मैदानी है। यहां 1.60 लाख हेक्टेयर में धान लगाया गया है। इनमें से 50 फीसदी हिस्सा सूखे की चपेट में रहा और फसल पहले ही सूख चुकी है। बाकी बची फसल में 80 फीसदी लेट वेरायटी की है, जिसमें कीटों ने हमला कर रखा है।
राजनांदगांव जिले के 2.15 लाख हेक्टेयर रकबे में धान की फसल ली जा रही है। इस इलाके के पनिका, मुरमुंदा, छुईखदान, छुरिया, पांडादाह आदि गांवों में लेट वेरायटी की फसल ली जा रही है। दुर्ग जिले के बेमेतरा, धनगांव, नवागढ़, धमधा, साजा आदि क्षेत्रों में भी लेट वेरायटी का रकबा ज्यादा है, और इसी वेरायटी में शीतब्लाइट, तनाक्षेदक, माहू और झुलसा जैसे रोग नजर आ रहे हैं।
महासमुंद जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर की फसल बीमारी से बरबाद हो चुकी है। बिलासपुर जिले में धान का रकबा 2.82 लाख हेक्टेयर है। इनमें से 45 हजार हेक्टेयर सूखे की चपेट में है और अब 35 हजार हेक्टेयर में झुलसा का प्रकोप है।
क्यों बने हालात
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभागाध्यक्ष डा. एसआर पटेल का कहना है, 15 दिनों पहले हुई बारिश के बाद धूप और उमस बढ़ी। लेट वेरायटी धान की बालियां अभी नहीं निकली हैं। पत्तियां नरम हैं, इस वजह से झुलसा (ब्लास्ट) का हमला हुआ।
पत्तियों में भूरे धब्बे आ गए हैं। पत्तियां झड़ रही हैं। अपेक्षाकृत कम अविध वाले धान की बालियां निकलने लगी हैं। इसमें भी शीतराठ नामक बीमारी की शिकायतें आई हैं। पादप रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. पीके तिवारी ने बताया कि धान की मध्यम और देर से पकने वाली किस्मों में बीमारी और कीड़ों का प्रकोप बढ़ा है। पत्तियां झुलसा से सूख रही हैं, साथ ही बालियों में कीड़े रस चूस रहे हैं।
क्या है झुलसा
कृषि कालेज के पादप रोग विशेषज्ञ डा. पीके तिवारी के मुताबिक झुलसा (ब्लास्ट) एक फंगल इंफेक्शन है। इससे धान की पत्तियों में आंख के आकार के भूरे धब्बे बनते हैं। धब्बे के फैलने से पत्तियां सूखकर झड़ने लगती हैं। बारिश के बाद उमस बढ़ने से यह रोग होता है। इसी तरह शीतब्लाइट पौधे की छाल को जला डालती है। यह भी एक प्रकार का फफूंद है। डा. तिवारी का कहना है, झुलसा बीमारी किसी स्थान विशेष में नहीं फैलती। जहां ज्यादा उमस होगी, इसका प्रकोप नजर आएगा। छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में साल, दो साल में इसका प्रकोप देखा गया है, खासकर जब मौसम अनुकूल नहीं हो।
मौसम के प्रभाव से धान में कीड़े लगना ही है। पत्तियों में बीमारियां हैं, यह सही है। कीटनाशकों से इस पर किसान नियंत्रण कर रहे हैं। राज्य के कुछ जिले सूखे की वजह से प्रभावित हैं। वहां की फसलें बरबाद हो चुकी हैं, लेकिन बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
—चिरंजीव सरकार, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि