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महंगा पड़ेगा रावण दहन!

बिलासपुर. शहर में इन दिनों नवरात्रि की धूम मच रही है। सुबह व शाम को मां दुर्गा की विशेष पूजा व आरती हो रही है, तो रात में डांडिया से जैसे पूरा शहर सराबोर है। जैसे ही नवरात्रि समाप्त होगी, दूसरे दिन शहर में दशहरा मनाया जाएगा।

त्रेतायुग के महापंडित दशानन के पुतले जलाए जाएंगे और लंका विजय की खुशियां मनाई जाएगी। हालांकि विजयादशमी नाम से प्रसिद्ध इस त्योहार में अभी कुछ दिन शेष है, लेकिन शहर में इसे लेकर पहले से ही तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। रावण के पुतले बनाने वाले व्यवसायी एक महीने पहले से ही काम में जुटे हैं और अब तो उनका काम पहले से भी अधिक बढ़ गया है। उनके हाथ तेजी से चल रहे हैं। वे आर्डर पूरा करने में लगे हैं। गांधी चौक, बस स्टैंड सहित शहर के कुछ अन्य स्थानों पर दुकानें सज चुकी हैं, जहां रावण के पुतले रखे गए हैं और उनकी बिक्री भी शुरू हो चुकी है।

एक फीट से लेकर 25 व 30 फीट तक के रावण के पुतले बरबस ही लोगों का ध्यान खींच रहे हैं लेकिन इनकी बढ़ी हुई कीमत ने रावण दहन करने वाली समितियों व मोहल्ले वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

बांस व कलर पेपर की कीमत में हुई वृद्धि के कारण रावण के पुतले भी महंगे हो गए हैं। पिछले कई सालों से इस व्यवसाय से जुड़े उमेश राव सालवे कहते हैं कि पिछले साल तक बांस 65 रुपए नग मिलता था, जो इस बार 120 रुपए में मिल रहा है।

कलर पेपर की कीमत प्रति नग डेढ़ रुपए से बढ़कर चार रुपए हो गई है। इससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। रामेश्वर राव कामले, सुभाष राव हिंगोले व महेश राव गौरी और बस स्टैंड में दुकान लगाने वाले महेश रजक सहित इस व्यवसाय से जुड़े लोगों का भी कुछ ऐसा ही कहना है।

कीमत में वृद्धि हुई है, लेकिन इनके पास 25-30 बड़े ‘रावण’ के आर्डर हैं। ऐसा अनुमान है कि रावण दहन करने वालों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। अकेले गांधी चौक की दुकानों से तकरीबन एक हजार रावण के पुतले बिक जाते हैं। इधर व्यवसायियों को उम्मीद है कि रावण दहन करने वाले कीमतों में हुई वृद्धि को नजरअंदाज कर रावण के पुतले खरीदने जरूर आएंगे। उनका आना कुछ हद तक शुरू भी हो चुका है। एक-दो दिनों में दुकानों में भीड़ लगनी शुरू हो जाएगी।





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