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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. व्यस्तता के चलते प्रोफशनल्स को पूजा-पाठ के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। सुबह जल्दी उठना, आफिस जाना मीटिंग अटेंड करना और ढेर सारी फाइलें, इस सब के बाद उन्हें जरा-सी फुर्सत नहीं मिलती।
इस बिजी शेड्यूल में भी कुछ प्रोफेशनल्स ऐसे हैं, जो मां दुर्गा की आराधना नियमित रूप से कर रहे हैं। सिटी भास्कर ने ऐसे ही कुछ प्रोफेशनल्स से बातचीत कर जानने कोशिश की कि इस व्यस्तताभरी दिनचर्या में कैसे करते हैं पूजा-पाठ।
एक बार जरूर जाते हैं मंदिर
वीआईएसएम कॉलेज के चेयरमैन सुनील कुमार राठौर बताते हैं कि नवरात्र में वह सुबह वक्त निकालकर आधे घंटे माता की पूजा करते हैं। साथ ही कॉलेज में प्रवेश करते ही कैबिन में रखी सरस्वती एवं पीतांबरा माता की पूजा करते हैं। उनका कहना है कि नौ दिन में एक बार ही सही, लेकिन शीतला माता के मंदिर जरूर जाते हैं। वह बताते हैं कि व्रत रखने में कई नियमों का पालन करना होता है, जिसे प्रोफेशनल लाइफ में उसे फॉलो करना काफी मुश्किल होता है, इसलिए वह व्रत नहीं रख पाते।
नियमित रूप से जाते हैं मंदिर
सोनी एक्सक्लूसिव शोरूम के संचालक धीरज गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने नौ दिन के व्रत रखे हैं। वैसे तो वह रोज ही मंदिर जाते हैं, लेकिन नवरात्रि के वक्त वह सुबह वक्त निकालकर कॉलोनी के मंदिर व मांढरे की माता जरूर जाते हैं। इसके अलावा शोरूम में स्थापित भगवान की पूजा-अर्चना भी करते हैं। उनका कहना है कि नवरात्रि में बिजनेस काफी अच्छा चलता है, जिसकी वजह से काम भी बढ़ जाता है। इसलिए पता ही नहीं चलता है कि व्रत रखा है।
व्रत नहीं, पाठ करते हैं
मार्केटिंग एग्जिक्यूटिव हिमानी देशपाण्डे बताती हैं कि वह नौ दिन का व्रत तो नहीं रखती हैं, लेकिन नियमित रूप से दुर्गे माता का पाठ करती हैं। इसके अलावा इन नौ दिनों में कम से कम दो बार मंदिर जरूर जाती हैं। उनका कहना है वह ज्यादातर ऑफिस से बाहर रहती हैं, इसलिए व्रत करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। फिर भी पाठ करने से मन को काफी शांति मिलती है।
शाम को करते हैं पूजा
इंटर्नशिप कर रहे डा. योगेश शुक्ला बताते हैं कि वह दिनभर डाक्टरों के साथ हॉस्पिटल में बिजी रहते हैं, इसलिए सुबह व दोपहर में पूजा के लिए वक्त नहीं निकाल पाते हैं। इसलिए शाम को घर आने के बाद अनिवार्य रूप से पूजा करते हैं। वह बताते हैं कि पहले कई सालों तक लगातार व्रत रखा है, लेकिन जब से नौकरी में आने के बाद पूजा के लिए ही वक्त नहीं मिलता। पूजा के लिए उन्हें वक्त मिले या न मिले, लेकिन वह हर दिन मंदिर जरूर जाते हैं।
जमीन पर सोते हैं
बिजनेसमैन राजेश शिवहरे का कहना हैं कि सालभर में नौ दिन ऐसे होते हैं, जब बिजनेस काफी अच्छा चलता है। नौ दिन शेड्यूल काफी टाइट रहता है, ऐसे में सुबह छह बजे उठकर पूजा के लिए वक्त निकालते हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने नौ दिन के व्रत भी रखे हैं और बिस्तर के बजाय जमीन पर सोते हैं। वह लगभग पंद्रह सालों से व्रत रख रहे हैं। व्रत करने पर मन प्रसन्न रहता है।