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अलगाववादियों के मंसूबे नाकाम

जम्मू. कश्मीर में अलगाववादियों के मंसूबों पर पुन: पानी फिर गया और सोमवार को उनका लाल चौक मार्च नहीं हो पाया। प्रशासन की सख्ती और कफ्यरू के कारण कोई भी प्रदर्शनकारी लाल चौक तक नहीं पहुंच सका। इससे पहले, 25 अगस्त को कश्मीरी अलगाववादियों ने ऐसे मार्च का आह्वान किया था लेकिन तब भी प्रशासन ने उनकी मार्च नहीं निकालने दिया था।

इस बार कथित आजादी के लिए रैली करने के वास्ते अलगाववादियों ने खास तैयारियां की थीं। रैली में शामिल होने के लिए लोगों से घर-घर जाकर संपर्क किया जा रहा था। कश्मीर को-ऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले अलगाववादी नेता घर-घर संपर्क कर इस रैली को कामयाब बनाने में लगे थे। पिछली बार की तरह इस बार भी बड़े नेताओं मसलन सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक को या तो गिरफ्तार कर लिया गया था या नजरबंद।

कई अलगाववादियों को हफ्ते भर पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस बार सख्त कफ्यरू के साथ लोकल केबल नेटवर्क के प्रसारण पर भी प्रतिबंध रहा। लाल चौक पर आवाजाही पर पाबंदी थी। श्रीनगर के बटमालू, मैसिमा और राजौरीकदल आदि क्षेत्रों में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कफ्यरू तोड़ने की कोशिश की लेकिन उन्हें रोक दिया गया।

जम्मू से कश्मीर नहीं गए वाहन
कफ्र्यू के मद्देनजर सोमवार को भी जम्मू से श्रीनगर जाने वाले वाहनों पर रोक जारी रही। वाहन हालांकि बनिहाल तक गए लेकिन उन्हें वहां से आगे नहीं जाने दिया गया। इससे हाइवे पर करीब 2000 वाहन फंस गए।

कश्मीरी लोग ऊब गए रोज-रोज के तमाशों से!
जम्मू. कश्मीर के लोग अब आए दिन होने वाले बंद और रैलियों से ऊबने लगे हैं। लोगों के बदले मूड की सोमवार को तब पहली झलक मिली जब घाटी में तीन स्थानों पर स्थानीय लोगों ने इन विरोध प्रदर्शनों और रैलियों से तौबा कर ली। नतीजतन पलक झपकते ही प्रशासन ने पहलगाम, कोकरनाग और श्रीगफवारा से कफ्यरू हटा दिया।

बताया जाता है कि इन तीनों स्थानों में दुकानदार और होटल मालिकों समेत लोगों ने प्रशासन से इस संदर्भ में लिखित आग्रह किया था। लोगों ने साफ किया कि वे न तो किसी विरोध-प्रदर्शन में भाग लेंगे और न ही कोई रैली निकालेंगे। साथ ही उन्होंने कफ्यरू हटाने का आग्रह भी किया। प्रशासन ने उन पर एतबार किया और वहां से कफ्यरू हटा लिया। कफ्यरू हटते ही सभी दुकानें खुल र्गई। चंद मिनटों में ही जन-जीवन बिल्कुल आम दिनों जैसा हो गया। घाटी में ऐसा यह पहला उदाहरण है जब लोग खुलकर सामने आए हैं।

अलगाववादियों की तैयारी धरी रह गई
जम्मू. कश्मीर में अलगाववादियों के मंसूबों पर पुन: पानी फिर गया और सोमवार को उनका लाल चौक मार्च नहीं हो पाया। प्रशासन की सख्ती और कफ्यरू के कारण कोई भी प्रदर्शनकारी लाल चौक तक नहीं पहुंच सका। इससे पहले, 25 अगस्त को कश्मीरी अलगाववादियों ने ऐसे मार्च का आह्वान किया था लेकिन तब भी प्रशासन ने उनकी मार्च नहीं निकालने दिया था। इस बार कथित आजादी के लिए रैली करने के वास्ते अलगाववादियों ने खास तैयारियां की थीं।

रैली में शामिल होने के लिए लोगों से घर-घर जाकर संपर्क किया जा रहा था। कश्मीर को-ऑर्डिनेशन कमेटी के बैनर तले अलगाववादी नेता घर-घर संपर्क कर इस रैली को कामयाब बनाने में लगे थे। पिछली बार की तरह इस बार भी बड़े नेताओं मसलन सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक को या तो गिरफ्तार कर लिया गया था या नजरबंद। कई अलगाववादियों को हफ्ते भर पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस बार सख्त कफ्यरू के साथ लोकल केबल नेटवर्क के प्रसारण पर भी प्रतिबंध रहा।

लाल चौक पर आवाजाही पर पाबंदी थी। श्रीनगर के बटमालू, मैसिमा और राजौरीकदल आदि क्षेत्रों में कुछ प्रदर्शनकारियों ने कफ्यरू तोड़ने की कोशिश की लेकिन उन्हें रोक दिया गया।





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