गुवाहाटी. असम में बोडो विद्रोहियों और बांग्लादेशियों के बीच छिड़े संघर्ष में मरने वालों की संख्या 40 हो गई है। राज्य सरकार ने कहा है कि यह हिंसा गैर आदिवासियों के जातीय सफाये का अभियान है, जो नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट आफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) चला रहा है।
इस बीच केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों के करीब 1400 सुरक्षाकर्मियों को उपद्रवग्रस्त इलाकों की ओर रवाना कर दिया है। सोमवार को उपद्रवियों ने दो लोगों की हत्या कर दी। दोनों समुदायों के बीच असम के उदालगिरी और दारांग इलाकों में हिंसा भड़कने के बाद 25 साल पुराना जातीय संघर्ष एक बार फिर छिड़ गया है। हिंसा में मारे गए 40 लोगों में से 15 तो केवल पुलिस गोलीबारी में ही मारे गए हैं।
गृहमंत्रालय का कहना है कि पुलिस की सहायता के लिए असम में सेना की पहले ही तैनाती की जा चुकी है। गृहसचिव मधुकर गुप्ता का कहना है कि असम सरकार के अधिकारियों के साथ स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। असम में बीएसएफ की दस कंपनियां दंगाग्रस्त इलाकों में तैनात की जा रही है।
खुफिया एजेंसियों ने असम पर केंद्र को चेताया
नई दिल्ली . खुफिया एजेंसियों ने केंद्र सरकार को चेताया है कि असम में हालात विस्फोटक हो गए हैं। सरकार ने बोडो आदिवासियों और बांग्लादेशियों के संघर्ष के मामले में कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। गृहमंत्रालय को मिली जानकारी के अनुसार एक वर्ग हालात का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है और स्थानीय भावनाएं भड़काई जा रही हैं।