इंदौर. धड़ाधड़ हो रहे गैर योजना मद के कार्यो को लेकर आखिरकार इंदौर विकास प्राधिकरण बोर्ड के पदाधिकारियों और सीईओ में तनातनी हुई। लंबे समय से इसे लेकर शीतयुद्ध चल रहा था।
सोमवार को बोर्ड बैठक में राजनीतिक पदाधिकारियों ने सीईओ की एक न चलने दी। उनका कहना था जिन योजनाओं में प्राधिकरण के भूखंड हैं, वहां होने वाले काम योजना मद में शामिल होना चाहिए। जबकि सीईओ का कहना था जो कॉलोनियां नगर निगम को दे चुके हैं, वे योजना मद के दायरे में नहीं ली जा सकतीं।
पदाधिकारियों ने अध्यक्ष मधु वर्मा पर भी दबाव बनाया। उपाध्यक्ष और संचालक सीईओ प्रमोद गुप्ता की इस बात से सहमत नहीं हुए कि रीजनल ऑडिट विभाग निगम को सौंपी कॉलोनियों में विकास कार्य करने पर आपत्ति लेता है। उपाध्यक्ष चंदू माखीजा का कहना था वैसे भी मद की पूरी राशि इस वित्तीय वर्ष में खर्च नहीं होगी। अंतत: सीईओ को पदाधिकारियों की बात मानना पड़ी।
बोर्ड को स्कीम-56-62 संघर्ष समिति के अध्यक्ष उमेश शर्मा ने एक ज्ञापन दिया। इसमें बस्ती के लिए स्कीम की 30 फीसदी जमीन मांगी गई है और प्राधिकरण व जमीन मालिक को 35-35 फीसदी जमीन देने का सुझाव दिया गया है। बोर्ड ने इस पर सैद्धांतिक रहमति देते हुए व्यवस्थापन पर निर्णय लेने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। बोर्ड बैठक में संचालक विजय मलानी, गायत्री बॉथम और मालती डागोर मौजूद थे।
..तो तोड़फोड़ कर दूंगा
विधानसभा क्षेत्र-३ में गैर योजना मद के काम शुरू न से संचालक टीकम जोशी तिलमिला गए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि काम नहीं शुरू हुए तो मैं तोड़फोड़ कर दूंगा। धरना-प्रदर्शन करूंगा, चाहे जेल क्यों न जाना पड़े। संचालक के इस रवैए से बोर्ड के अन्य सदस्य भी सकते में आ गए। सूत्रों ने बताया टेंडर नहीं आने के कारण श्री जोशी के क्षेत्र में काम नहीं शुरू हो सके जबकि संचालक चाहते हैं बिना टेंडर बुलाए किसी ठेकेदार को ये काम करा लिए जाएं।
12 करोड़ के काम मंजूर
बोर्ड ने छोटे-बड़े 12 करोड़ के काम स्वीकृत किए। इनमें रसोमा लैब चौराहा से रिंगरोड तक 30 मीटर चौड़ी रोड को सीमेंट-कांक्रीट से बनाने का निर्णय शामिल है।