जयपुर. जयपुर नगर निगम ने चार साल के दौरान भले ही 11 उपविधियां (बाय लॉज) बनाई, लेकिन सरकार ने सभी को ‘संशोधित करें’ की टिप्पणी के साथ निगम को लौटा दिया। दो बार संशोधन के बाद सरकार ने विज्ञापन उपविधि को मंजूरी दे दी है, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी नगर निगम इस उपविधि के नियम लागू नहीं कर पाया है।
इससे शहर में बेतरतीब लगे विज्ञापनों पर लगाम नहीं लग पाई है। इसके अलावा शहर में गली-गली में ब्यूटी पार्लर खुल रहे हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए नगर निगम की नियम उप-नियम समिति ने उपविधियां बनाकर सरकार को भेजीं, लेकिन संशोधन का हवाला देते हुए सरकार ने इन्हें लौटा दिया।
इसमें प्रावधान किया गया था कि ब्यूटी पार्लर खोलने से पहले निगम से लाइसेंस लेना जरूरी होगा। लाइसेंस लिए बिना ब्यूटी पार्लर चलाने पर संबंधित व्यक्ति से मोटा जुर्माना वसूला जाएगा।
शहर में सार्वजनिक स्थलों पर लगने वाले विज्ञापनों को लेकर समिति ने वर्ष 2004 में उपविधियां बनाई थीं। इसमें यह प्रावधान था कि सार्वजनिक स्थानों पर निगम की अनुमति के बिना न तो विज्ञापन चस्पा किया जा सकेगा और न ही सार्वजनिक जगहों पर कुछ लिखा जा सकेगा। प्रस्ताव बनाकर सरकार को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया था। इसके बाद सरकार ने इसे संशोधन के लिए निगम को लौटा दिया। इसके बाद संशोधित कर बनाए गए विज्ञापन उपविधि 2008 को सरकार ने स्वीकृति दे दी, लेकिन यह अभी तक लागू नहीं हो पाया है।
नियम लागू होता तो वाहनों के जाम से मिलती राहत
शहर में चलने वाले हाथ ठेला, बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी, बैलगाड़ी, रिक्शा ट्रॉली तथा तांगा को भी यातायात के नियमों के दायरे में लाने के लिए निगम ने 2007 में उपविधियां बनरई। इन्हें स्वीकृति के लिए सरकार को भेजा गया, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।
निगम का मानना था कि इन वाहनों पर भी नो पार्किग, ट्रैफिक सिग्नल का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने, स्टॉप लाइन का पालन करने, वन वे तथा यू टर्न लेने से संबंधित नियमों का पालन करने वाले नियमों का पालन कराया जाए। शहर में धीमी गति के वाहन बिना नियमों के चलाए जाते हैं। इससे जगह-जगह जाम की स्थिति बन जाती है। नियम लागू होने से इससे भी राहत मिलने की संभावना जताई गई थी।
अधिकारियों की लापरवाही से नहीं हो रही स्वीकृत
नगर निगम की नियम उपनियम समिति के चेयरमैन प्रभातीलाल शर्मा का कहना है कि विज्ञापन की उपविधियां सरकार ने स्वीकृत कर ली थीं। इसके बाद भी अधिकारी उसको लागू करने में हिचकिचा रहे हैं। सभी प्रकार की उपविधियां आम जनता को ध्यान में रख कर बनाई र्गई, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से राज्य सरकार से इन्हें मंजूरी नहीं मिल रही है।
कब कौन उपविधि
>> शहर में सरकारी संपत्ति पर बिना निगम की अनुमति के विज्ञापनों को लेकर 2004 में।
>> निगम क्षेत्र में चलने वाले हाथ ठेला, बैलगाड़ी, ऊंटगाड़ी, रिक्शाट्रॉली, तांगा व धीमी गति के वाहन चलाने की उपविधियां 2007 में।
>> शहर में फैलने वाले ठोस कचरा प्रबंधन के लिए उपविधियां 2005 में।
>> विवाह स्थल उपविधियां 2005 (निगम की अनुमति से ही विवाह स्थल चलाने को लेकर नियम बनाए गए नियम)।
>> निगम क्षेत्र में अचल संपत्तियों के हस्तांतरण पर अधिभार को लेकर नियम 2005 बनाया गया।
>> निगम क्षेत्र में चलने वाले ब्यूटी पार्लर के लिए उपविधियां 2006 बनाया गया।
>> भवनों पर गुलाबी रंग करने संबंधित उपविधियां 2006 तैयार किया गया।
>> निगम क्षेत्र में बनने वाले तरणताल को लेकर 2007 में उपविधियां बनाई।
>> शहर में लगने वाले विज्ञापनों को लेकर बनाई गई उपविधियां 2007 में संशोधन किया गया।
>> संशोधित विवाह स्थल उपविधियां 2007 बनाया गया।
>> जयपुर नगर निगम पर्यावरण उपविधियां 2007 तैयार किया गया।