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गला रेतकर अपनी ही बलि देने की कोशिश

बिलासपुर. सिद्धि प्राप्त करने के लिए यूनिवर्सिटी के कर्मचारी ने रविवार की रात सिरगिट्टी के खार में साधना शुरू की। इस बीच उसने अपनी ही बलि देने के लिए गला रेत लिया।

सुबह कुछ ग्रामीणों ने उसे लहूलुहान वहां बैठे देखा और कुछ ही समय में यह बात पूरे गांव में फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस वहां पहुंची और उसे समझा-बुझाकर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का अपराध दर्ज कर लिया है।

तारबाहर पुलिस के अनुसार सिरगिट्टी, आवासपारा निवासी अजरुन भुने पिता कामता प्रसाद (32) यूनिवर्सिटी का कर्मचारी है। उसके परिवार मंे पत्नी व 3 बच्चे हैं। उसने नवरात्रि में छठ और सप्तमी की दरमियानी रात में सिद्धि प्राप्त करने के लिए विशेष साधना करने की तैयारी की थी। रविवार देर रात वह अपने गुरु सत्यनारायण बाबा व कुछ देवी-देवताओं की तस्वीर के साथ पूजा-पाठ का सामान लेकर बस्ती के बाहर एक खेत में पहुंचा।

वहां सामान को व्यवस्थित कर उसने साधना शुरू की। वह अपने साथ एक धारदार उस्तरा और चाकू भी ले गया था। देर रात साधना के बीच उसने उस्तरे से धीरे-धीरे अपनी गर्दन को रेतना शुरू कर दिया। थोड़ी-थोड़ी देर में वह उस्तरा अपनी गर्दन पर चलाता था।

सोमवार तड़के बस्ती के कुछ ग्रामीण दिशा-मैदान के लिए खेत की ओर गए। उन्होंने अजरुन को साधना करते हुए देखा। पास जाकर देखने पर उन्होंने देखा कि वह आंखें बंद कर साधना कर रहा है और उसके गले से काफी खून बह रहा है। कुछ ही समय में यह खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई। लोग तमाशबीन बनकर उसकी साधना को देख रहे थे। वह कुछ देर तक आंखे बंद कर मंत्र बुदबुदाता, फिर अपने गले में उस्तरा चलाता था।

इस बीच किसी ने पुलिस को घटना की सूचना दे दी। तारबाहर टीआई नसर सिद्धिकी स्टाफ सहित वहां के लिए रवाना हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस पर्याप्त बल के साथ गांव पहुंची। अजरुन की श्वांस नली भी एक ओर से कट गई थी। पुलिस उसे समझा-बुझाकर जिला अस्पताल लेकर गई, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सिम्स रिफर कर दिया गया। पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 309 के तहत आत्महत्या के प्रयास का अपराध दर्ज कर लिया है।

गुरु की राह पर चलना चाहता था: जानकारी के अनुसार अजरुन बचपन से ही पूजा-पाठ में काफी विश्वास करता है। कुछ समय पहले वह किसी काम से रायगढ़ गया था। वहां उसकी भेंट सत्यनारायण बाबा से हुई, जो पिछले 10 वर्षो से रायगढ़ के पास एक स्थान पर समाधि पर बैठे हुए हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि स्वयं भगवान शिव की प्रेरणा से वे समाधि पर बैठे हैं। समाधि पर बैठने से पहले साधना करते हुए उन्होंने अपनी जीभ काटकर चढ़ा दी थी। अजरुन भी इसी तरह की आराधना करते हुए अपना गला काटना चाह रहा था।





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