भोपाल. अकसर अखबारों में ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं कि एक १५ वर्षीय किशोर ने पड़ोस में रहने वाली लड़की के साथ बलात्कार किया। १६ वर्षीय एक लड़के ने १३ वर्षीय लड़की से गुपचुप तरीके से शादी कर ली और जब लड़की ने इसे पैरेंट्स के सामने मानने से इंकार कर दिया तो उसने लड़की पर एसिड फेंक दिया।
इस तरह की खबरें बच्चों में बढ़ रही आपराधिक प्रवृत्ति की ओर इशारा करती हैं। बच्चों की आपराधिक प्रवृत्ति हमारे समाज के लिए एक ज्वलंत समस्या है। विशेषज्ञ इसके लिए पैरेंट्स को जिम्मेदार मानते हैं। उनके अनुसार गलत पैरेंटिंग ही बच्चों को अपराधों में लिप्त कर देती है।
क्या वाकई पैरेंट्स हैं जिम्मेदार?
आजकल बच्चे चोरी, मारपीट, छेड़छाड़, किडनैपिंग, साइबर क्राइम से लेकर बलात्कार जैसे संगीन अपराधों में भी लिप्त पाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा हैरानी तो इस बात की है कि बच्चों की इस तरह की प्रवृत्ति या व्यवहार की पैरेट्स को जानकारी ही नहीं होती है। पुलिस से लेकर साइकोलॉजिस्ट तक सभी इसके लिए पैरेंट्स को जिम्मेदार ठहराते हैं कि वे अपने बिजी शैड्यूल के चलते बच्चे पर ध्यान नहीं दे पाते हैं, लेकिन यहां यह स्पष्ट करना बहुत जरूरी है कि कोई भी पैरेंट्स अपने बच्चे से बहुत प्यार करते हैं। उन्हें बच्चे पर पूरा यकीन होता है कि वह कुछ गलत नहीं करेगा। बस इसी विश्वास के चलते वे अपने बच्चे पर निगरानी नहीं करते हैं।
ऐसे में ध्यान दें
विशेषज्ञ बताते हैं कि पैरेंट्स को अपने बच्चे के व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि बच्च अधिक चुपचाप रहता है, अचानक बहुत तेज गुस्सा करने लगता है, उसे पैनिक अटैक आते हैं, ज्यादातर समय घर से बाहर बिताता है या फिर ऐसा व्यवहार करता है जैसा कि आमतौर पर बच्चे नहीं करते हैं, तो ऐसे में पैरेंट्स को ध्यान देने की जरूरत है।
ईक्यू की कमी भी है एक कारण
साइकोलॉजिस्ट कहते हैं कि आजकल के बच्चों का ईक्यू यानी इमोशनल कोशेंट बहुत कम होता है। उनमें किसी चीज के लिए इंतजार करने की प्रवृत्ति भी नहीं होती है। इसके चलते अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए वे कुछ भी कर गुजरने को तैयार हो जाते है।
भारी पड़ती इंटरनेट की ईजी एक्सेस
आजकल इंटरनेट आसानी से हर कहीं उपलब्ध हो गया है। बच्चे घंटों तक इंटरनेट यूज करते हैं। पढ़ाई के बजाय उनका ध्यान अन्य बातों की तरफ भी होता है। पैरेंट्स सोचते हैं कि बच्च पढ़ाई कर रहा है, लेकिन अकसर ऐसा नहीं होता। विशेषज्ञ कहते हैं कि कंप्यूटर यूज करने वाले बच्चों के पैरेंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को अकेले कंप्यूटर पर काम न करने दें। वे समय-समय पर उसके पास जाएं और चेक करते रहें। साथ ही अपने बच्चे को बताएं कि नेट पर काम करने के कौन-कौन से खतरे हैं।
मेहनत का पाठ पढ़ाना है जरूरी
यदि पैरेंट्स खुद ही इस बात को मानते हैं कि जल्दी अमीर बनने के लिए कुछ भी किया जा सकता है, तो फिर वे अपने बच्चों के लिए गलत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। हर पैरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों को मेहनत और ईमानदारी का पाठ पढ़ाएं।