भारतीय क्रिकेट के सफलतम कप्तान रहे सौरव गांगुली का विवादों से गहरा नाता रहा है। पूरे करिअर में उनकी नेतृत्व शैली ‘जैसे को तैसा’ वाली रही। वे भारत के ऐसे पहले कप्तान कहे जा सकते हैं, जो विपक्षी टीम से मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह लोहा लेते थे। कई बार इसी के चलते वे विवादों में भी घिरे।
पानी की वह बोतल
‘बंगाल टाइगर’ ने अपने हठी स्वभाव का परिचय 1992 में अपनी पदार्पण सीरीज में ही दे दिया था। ऑस्ट्रेलिया में हुई त्रिकोणीय वनडे सीरीज से पदार्पण करने वाले सौरव ने मैदान के भीतर साथी खिलाड़ी के लिए पानी की बोतल ले जाने से इनकार कर दिया था।
अमूमन टीम का अतिरिक्त खिलाड़ी अपने साथी खिलाड़ियों के लिए ‘ड्रिंक्स’ लेकर मैदान में जाता है। इस अनुशासनहीनता के कारण ही सौरव को अगले चार सालों तक टीम से बाहर रहना पड़ा।
चैपल विवाद
टीम इंडिया के पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोच ग्रेग चैपल के साथ सौरव का विवाद लंबा चला और सर्वाधिक चर्चित भी हुआ। जिम्बाब्वे दौरे पर सौरव को कप्तानी छोड़ने की सलाह देने वाले चैपल ने बीसीसीआई को भेजे अपने ई-मेल में कहा कि अपनी कप्तानी बचाने के लिए सौरव टीम में फूट डाल रहे हैं। इसके कुछ दिनों बाद खराब फॉर्म, फिटनेस और चैपल से तनातनी के चलते सौरव को टीम से निकाल दिया गया। 10 महीने बाद वे राष्ट्रीय टीम में वापसी करने में कामयाब रहे। गौरतलब है कि कोच के रूप में चैपल, सौरव की ही पसंद थे।
लॉर्डस में लहराई शर्ट
सौरव ने नेटवेस्ट क्रिकेट सीरीज के फाइनल में जीत की खुशी का इजहार लॉर्डस के पेवेलियन से शर्ट लहराकर किया था। क्रिकेट जगत में इसे अशोभनीय माना गया और भारत में इसकी कड़ी प्रतिक्रिया हुई। हालांकि, बाद में सौरव ने कहा कि यह एंड्रयू फ्लिंटॉफ के जश्न का जवाब था। गौरतलब है कि फ्लिंटॉफ ने इससे पहले भारत में वनडे सीरीज जीतने का जश्न मैदान पर टी-शर्ट उतारकर मनाया था।
स्टीव वॉ को करवाया था इंतजार
2001 में भारत दौरे पर आई ऑस्ट्रेलिया टीम के कप्तान स्टीव वॉ को सौरव गांगुली ने टॉस के लिए 10 मिनट का इंतजार कराया। इसे उन्होंने भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर फिर दोहराया। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स सहित कई अन्य विदेशी खिलाड़ियों ने इसे खेल भावना के विपरीत करार दिया। हालांकि सौरव गांगुली ने इसे मनोवज्ञानिक लड़ाई करार दिया था।
बताते हुए कहा कि 2001 में भारत दौरे पर पहले टेस्ट में मेहमान कप्तान वॉ ने उन्हें टॉस के लिए इंतजार कराया था। इसके बाद ही उन्होंने वॉ को टॉस के लिए इंतजार कराने का निश्चय किया।
डालमिया का विरोध
सौरव क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) के चुनावों में पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया का विरोध करने के लिए भी खासे चर्चित हुए। हालांकि सौरव के पूरे क्रिकेट करिअर में डालमिया उनके सबसे बड़े हितैषी रहे। स्लो ओवर रेट के चलते वे मैच खेलने से प्रतिबंधित भी हुए।