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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. के सेवा करें भाई, थारी ..अगली बार किसी टेलीकॉम, बैंकिंग कंपनी के कॉल सेंटर पर ठेठ हरियाणवी में बात करनी हो तो यह सुनने को मिल सकता है। देश का ग्रामीण बाजार अब कॉरपोरेट कंपनियों के सिर चढ़ कर बोल रहा है।
अब बीपीओ कंपनियां ऐसे लोगों को ढूंढ रहीं हैं जिन्हें ब्रिटिश या अमेरिकी अंदाज में इंग्लिश की बजाए ठेठ हरियाणवी में बात करना आता हो।
करीब 25 हजार कर्मियों की वर्कफोर्स रखने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी बीपीओ कंपनी इंटेलीनेट ऐसे 610 लोगों को अपने कॉलसेंटर्स पर नौकरी दे चुकी हैं जो कि ठेठ हरियाणवी में ही बात करते हुए हरियाणी बोलने वालों को अपनी कॉल सर्विस दे रहे हैं।
कंपनी अभी भी ऐसे लोगों की तलाश में हैं, जो टेलीकॉम, इंश्योरेंस, बैंकिंग सैक्टर्स की कंपनियों के ग्राहकों को हरियाणवी में सर्विस दे सकें। इंटेलीनेट ग्लोबल सर्विसज की सीईओ राधिका बाला सुब्रहमणियम के अनुसार उन्होंने साल 2006 में भारतीय कंपनियों को कॉल सर्विस देना शुरू किया था और अब 40 से अधिक भारतीय कंपनियां उनकी सर्विसज ले रही हैं।
इन कंपनियों को इंटलीनेट करीब 15 भारतीय भाषाओं में कॉल सेंटर सर्विस दे रही है। राधिका के अनुसार अब क्षेत्रीय बोलियों में भी सर्विस शुरू की गई है। पंजाबी में तो कंपनी पिछले साल से सर्विस दे रही थी लेकिन अब हरियाणवी में सर्विस दी जा रही है।
राधिका के अनुसार भारत में अभी तक कॉल सेंटर्स का मतलब विदेशी कंपनियों के ग्राहकों को सर्विस देना ही होता था परंतु घरेलू कंपनियां भी अब तेजी से कॉल सेंटर्स की सर्विसज ले रही हैं। अभी तक कुछ प्रमुख भाषाओं में ही यह सर्विस ली जा रही थी लेकिन एक बड़े बाजार के हर पहलू तक पैठ बनाने के लिए कंपनियां ग्राहकों को अपने स्तर पर लाने की बजाए खुद उसके स्तर पर उतर रही हैं।
पंजाबी, गुजराती, राजस्थानी, मराठी, तमिल, तेलगू आदि प्रमुख भाषाओं के बाद हरियाणवी, भोजपुरी, असमी आदि नजरअंदाज रही भाषाओं और बोलियों में भी कॉल सेंटर्स सर्विस देने की मांग आ रही है।
मोहाली में विस्तार: इंटेलीनेट के मोहाली कॉल सेंटर में दो हजार से ज्यादा कर्मचारी हो चुकें हैं। कंपनी ने दो साल पहले ही यह सेंटर शुरू किया था और यहीं से पंजाबी और हरियाणवी में सर्विसज दी जा रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनी अब इस सेंटर का विस्तार कर रही है।