अहमदाबाद.
बहुचर्चित लखटकिया कार नैनो परियोजना के संयत्र को साणंद में लगाने के फैसले को टाटा समूह अध्यक्ष रतन टाटा खुद का घर लौटना मानते हैं। गुजरात को नैनो की सौगात देने के ऐलान के बाद मंगलवार को रतन टाटा ने केवल ‘ दिव्य भास्कर ’ के साथ आराम से की गई लंबी बातचीत में यह बात कही ।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से हटने के फैसले के बाद मुझे सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नैनो के लिए प्रस्ताव भेजे थे परंतु सभी जरूरी पहलुओं की पड़ताल के बाद गुजरात में संयत्र लगाने का फैसला करने में मुझे महज 15 मिनट लगे।
..और मैं मूर्ख नहीं :
वायब्रैंट गुजरात इनवेस्टमेंट समिट के अध्यक्षीय भाषण में टाटा ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि अगर आप गुजरात में निवेश नहीं करते हैं तो आप मूर्ख हैं। अब टाटा कहते हैं कि आई एम नॉट स्टूपिड एनी लांगर ।
..वो पांच मिनट :
सिंगुर से हटने के फैसले की घड़ी के बारे में पूछने पर टाटा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का आंदोलन एवं हिंसा इतनी तीव्र थी कि समूह को विवश होकर 22 अगस्त को वहां से परियोजना हटाने की व्यथा व्यक्त करनी पड़ी परन्तु पांच मिनट में ही नरेन्द्र मोदी ने ‘गुजरात में स्वागत है ’ मैसेज भेज कर सबसे पहला गर्मजोशी भरा न्यौता दिया।
नहीं बढ़ेगी कीमत :
रतन टाटा ने कहा कि नैनो के लिए सबसे अधिक मूल्यवान समय है। इसलिए समूह निर्धारित समय एवं कीमत के वचन से पीछे नहीं हटना चाहता।
इसलिए गुजरात :
उन्होंने कहा कि गुजरात ही एक मात्र ऐसा राज्य था जिसमें बिना किसी विवाद के नरेन्द्र मोदी ने मात्र एक हस्ताक्षर करके सिंगूर से अधिक भूमि मैं अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उतरा उसके एक घंटे के भीतर विधिवत रूप से समूह को हस्तातंरित कर दी।
अविवाहित के अलावा:
यह पूछे जाने पर कि रतन टाटा एवं मोदी दोनों अविवाहित हैं । इसके अलावा दोनों के व्यक्तित्वों में क्या समानता है । टाटा ने हंसते हुए कहा कि मोदी अधिक कार्यसक्षम एवं प्रभावशाली नेता है। विगत पंद्रह दिन से लगातार में मैं उनके संपर्क में था। मोदी का रिस्पोंस टाइम बेस्ट है।
यह था पैकेज:
उन्होंने कहा कि पत्रकारबंधु जानना चाहते हैं कि मोदी ने टाटा समूह को क्या-क्या ऑफर किया, पैकेज क्या है। मेरा जवाब है कि गुजरात का औद्योगिक माहौल, जनता का सहयोगात्मक मिजाज एवं इंफ्रास्ट्रक्चर ही बेस्ट पैकेज है।