भोपाल. वर्तमान सत्र में कॉलेजों में लागू की गई सेमेस्टर पद्धति में हर माह की जाने वाली सतत् आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया में अब कोई छात्र फेल नहीं होगा। न्यूनतम अंकों से कम अंक पाने वाले छात्रों का दोबारा सतत् आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके लिए उन्हें अलग से पढ़ाया भी जाएगा। नयी व्यवस्था में मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए सेमेस्टर के दौरान ली जाने वाली दोनों आंतरिक परीक्षाओं में पास होना जरूरी है। इसलिए छात्रों को एक और मौका देने के लिए कहा जा रहा है।
इस पद्धति में एक सेमेस्टर की मुख्य परीक्षाओं के पहले दो आंतरिक मूल्यांकन किए जाने हैं। मुख्य परीक्षाओं के अंकों में आंतरिक मूल्यांकन के अंकों को जोड़कर ही परिणाम तैयार किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग ने प्राचार्यो को ताकीद दी है कि आंतरिक मूल्यांकन में न्यूनतम अंक से भी कम अंक लाने वालों छात्रों का दोबारा टेस्ट लिया जाए। इसके लिए छात्रों को अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर दोबारा पढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि ऐसे छात्र दूसरे मौके में पास हो सकें।
अनुपस्थित छात्र शामिल नहीं : दोनों सतत् आंतरिक मूल्यांकन में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही पूरे सेमेस्टर के दौरान 75 प्रतिशत उपस्थिति पूरी न करने वाले छात्रों को भी परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा।
अंतिम टाइम टेबल अभी नहीं : उच्च शिक्षा विभाग ने विधानसभा चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद ही सेमेस्टर परीक्षा का टाइम टेबल जारी करने को कहा है। इससे पहले जारी किया गया टाइम टेबल अस्थाई माना जाएगा।
डिग्री होगी अमान्य : स्वशासी कॉलेजों को भी विभाग ने चेतावनी दी है। विभाग ने साफ किया है कि कुलाधिपति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम और परीक्षा पद्धति न अपनाने वाले कॉलेजों के विद्यार्थियों की डिग्री अमान्य कर दी जाएगी। ऐसी संस्थाओं को शासकीय अनुदान भी नहीं दिया जाएगा।
दो बार होगा मूल्यांकन : एक सेमेस्टर के दौरान सतत आंतरिक मूल्यांकन की प्रक्रिया दो बार की जाएगी। इसके लिए पहला मूल्यांकन अगस्त के अंतिम सप्ताह तक किया जाना था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर आठ सिंतबर कर दिया गया।
इसी तरह सितंबर के अंत तक पूरा मूल्यांकन पूरा करने को कहा गया था, लेकिन अब सात अक्टूबर तक का समय दिया गया है। कैसे होगा सतत मूल्यांकन: सतत मूल्यांकन गैर पारंपरिक विधाओं से किया जाएगा। इसके लिए क्विज, असाइनमेंट और प्रस्तुतिकरण, कक्षा अध्यापन, समूह चर्चा, पोस्टर या चार्ट बनाना, सरप्राइज टेस्ट जैसी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी। जाहिर है इन प्रक्रियाओं से मूल्यांकन होने पर किसी भी छात्र के फेल होने की संभावनाएं काफी कम हैं।
सेमेस्टर पर जारी असमंजस
प्रदेश के कॉलेजों में सेमेस्टर प्रणाली लागू करने पर सरकार खुद की पीठ थपथपा रही है। सरकार ने सेमेस्टर सिस्टम लागू करने वाला पहला राज्य होने का रुतबा तो हासिल कर लिया, लेकिन असलियत में इस नई व्यवस्था को कॉलेजों का स्टाफ अभी तक पूरी तरह समझ ही नहीं पाया है। व्यवस्था के हर चरण को लागू करने के लिए बार-बार निर्देश जारी करने और याद दिलाने के बावजूद प्राचार्य और स्टाफ का असमंजस दूर न हो पाना इस व्यवस्था को शुरुआती दौर में कमजोर साबित कर रहा है। सोमवार से शुरू हुई संभागवार समीक्षा बैठकों में यही तस्वीर सामने आ रही है।
सरकार ने सेमेस्टर सिस्टम लागू करने के निर्णय को सर्वसम्मति से और पूरी तरह सोच विचार कर लिया गया फैसला बताया है, लेकिन राष्ट्रीय ज्ञान आयोग की अनुशंसा पर शुरू की गई यह पद्धति असलियत में अपने पहले चरण में ही लड़खड़ा रही है।
प्रवेश प्रक्रिया शुरू हुए चौथा माह आ जाने पर भी अभी भी प्राचार्र्यो द्वारा प्रवेश दिए जाने को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग में यह स्थिति तब सामने आई, जब कई प्राचार्र्यो ने प्रवेश संबंधी सवाल किए और विभाग के अधिकारियों द्वारा कि ए गए व्यवस्थागत सवालों के जवाब भी नहीं दे सके। जबकि सप्ताह मे लगभग हर दूसरे दिन प्रवेश संबंधी दिशा निर्देश विभाग की वेबसाइट पर जारी किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद परंपरागत तरीके से बंधे हुए प्राचार्य नई व्यवस्था को समझ नहीं पा रहे हैं। जाहिर है, कंप्यूटरीकरण और आधुनिक सूचना संचार माध्यमों को अपनाने में प्राचार्यों को परोशानी हो रही है। विभाग के आला अधिकारी भी इस स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं। उच्च शिक्षा आयुक्त आशीष उपाध्याय ने माना है कि प्राचार्य और क्षेत्रीय संचालक प्रतिदिन मेलबाक्स और वेबसाइट नहीं देख रहे हैं। इस लापरवाही के लिए एक बार फिर प्राचार्यों को ताकीद किया जा रहा है कि सूचना न मिलने पर होने वाली गलतियों की जिम्मेदारी स्वयं प्राचार्य की ही होगी।