भोपाल. नई कॉलोनी विकसित करने के लिए भूमि की उपलब्धता सीमा घट कर डेढ़ एकड़ तक हो जाने पर भोपालवासियों को काफी राहत मिलने की संभावना है। कैबिनेट यदि यह निर्णय ले लेती है तो मकानों की कीमतों में गिरावट आएगी।
गत वर्ष आवास नीति में किए गए संशोधन के तहत नई कॉलोनी बनाने के लिए कम से कम आठ हेक्टेयर (20 एकड़) जमीन होने की बाध्यता से भोपाल में नई कॉलोनियां बनना बंद हो गई थीं। जिससे मकानों की कीमतों में बीस से तीस प्रतिशत तक की वृद्धि हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में जमीन की उपलब्धता प्रति भूस्वामी आधा एकड़ है। यदि डेढ़ एकड़ भूमि पर नई कॉलोनी विकसित करने की अनुमति मिली तो तीन व्यक्ति मिलकर एक कॉलोनी का विकास कर सकेंगे। नगर निगम का रिकार्ड बताता है कि गत वर्ष उसने जिन कॉलोनियों को विकसित करने की अनुमति जारी की है उसमें अधिकतर डेढ़ से तीन एकड़ तक की ही हैं।
इस तरह घटेंगी मकानों की कीमत: डेढ़ एकड़ तक के भूखंड पर कालोनी बनाने की अनुमति से शहर में नई कॉलोनियों का विकास होने लगेगा। जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा आएगी और मकानों की कीमतों में गिरावट आएगी।
यदि कैबिनेट यह नियम बनाती है तो शहर में नई कॉलोनियां विकसित होना शुरू हो जाएंगी, जिससे निगम की आय में भी वृद्धि होगी।
—सुनील सूद, महापौर
इसका सबसे ज्यादा फायदा नागरिकों को मिलेगा। इस निर्णय के बाद लोगों को शहर में या अपने कार्य स्थल के पास मकान उपलब्ध हो सकेंगे। वर्तमान में शहर में एक साथ आठ हेक्टेयर भूमि उपलब्ध नहीं होने पर शहर से बाहर ही नई कॉलोनियां विकसित होने की संभावना थी।
—अमोघ गुप्ता, आर्किटेक्ट
आठ हेक्टेयर के बंधन का असर
>> पिछले दस सालों में विकसित हरुई कॉलोनी-500
>> पिछले एक साल में विकसित हरुई कॉलोनी-50
>> अक्टूबर 07 से अब तक
यह था प्रतिबंध का उद्देश्य
>> शहर का नियोजित विकास
>> ट्रैफिक के अनुसार सड़कें
>> पेयजल व सीवेज की उचित व्यवस्था
यह पड़ा असर
>> छोटे कॉलोनाइजर बाजार से बाहर हुए
>> बड़े कॉलोनाइजरों ने नई कॉलोनियां विकसित करने में रुचि नहीं ली
>> मकानों की कीमतों में वृद्धि हुई
निगम को होगा फायदा
नगर निगम को भवन निर्माण अनुमति जारी करने के एवज में प्रति वर्ष दो से तीन करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता रहा है। पिछले एक वर्ष में एक भी नई कॉलोनी की अनुमति जारी नहीं हुई, जिससे निगम को लगभग दो करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।