भोपाल. राजनीतिक दल मतदाता सूचियों में नाम छूटने के आरोप इस बार नहीं लगा पाएंगे। इसके लिए चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम गायब होने के आरोप से निजात पाने का नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला है।
अब छूटे नामों को जोड़ने का जिम्मा राजनीतिक दलों के पाले में ही डाला जा रहा है। इस काम को अंजाम देने राजनीतिक दल अपने-अपने स्वयंसेवक तैनात कर सकेंगे। वे मतदान के चंद रोज पहले तक छूटे नाम जुड़वा सकेंगे। पार्टियों के वालिंटियर संबंधित मतदाता का आवेदन लेकर उसे निर्वाचन अधिकारी के यहां जमा करा सकेंगे। आयोग ऐसा इंतजाम पहली बार कर रहा है। नई व्यवस्था आसन्न विधानसभा चुनाव वाले राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, दिल्ली, मिजोरम और जम्मू-कश्मीर में एक साथ लागू की जा रही है।
आयोग ने इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश भेज दिए हैं। इनके मुताबिक मुख्य मतदाता सूचियों के प्रकाशन के बाद ऐसे मतदाताओं की पूरक सूची तैयार की जाएंगी, जिनके नाम किसी वजह से मुख्य सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं।
इसके लिए मतदान के कुछ रोज पहले तारीख का ऐलान कर ऐसे मतदाताओं से आवेदन लिए जाएंगे। पक्की जांच करने के बाद आवेदन को मंजूर या निरस्त किया जाएगा। मंजूर आवेदनों के आधार पर पूरक सूची बनाई जाएगी। इसे मुख्य सूची के साथ शामिल किया जाएगा। मतदान के दिन मतदानकर्मी और उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट इन मतदाताओं की खासतौर पर पुष्टि करेंगे।
राजनीतिक दल ऐसे जुड़वा सकेंगे वोटरों के नाम
राजनीतिक दल इस काम के लिए अपने अधिकृत वालिंटियर नियुक्त कर सकेंगे, जो ऐसे मतदाताओं से आवेदन लेंगे, जिनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल होने से छूट गए हैं। वालिंटियर यह आवेदन इस काम के लिए नियुक्त रिर्टिनग आफिसर के यहां जमा कराएंगे। रिर्टिनग आफिसर ऐसे आवेदनों की जानकारी तारीख के अनुसार दर्ज करेगा। आवेदनों की छंटनी की जाएगी। उन पर छंटनी करने वाले अधिकारी का नाम भी दर्ज किया जाएगा। जिन आवेदनों को सही पाया जाएगा। उन्हें पूरक मतदाता सूची में दर्ज कर लिया जाएगा।
‘निर्वाचन आयोग ने इस बार मतदाता सूचियों में शामिल होने से छूट गए मतदाताओं के आवेदन प्राप्त कर पूरक सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस काम में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि वांलिटियरों की भी मदद ली जाएगी। यह प्रक्रिया आगामी विधानसभा चुनाव से ही शुरू हो रही है।’
- जेएस माथुर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मप्र