इंदौर. जिले के 17 बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं और उसे सीएचएल अपोलो अस्पताल के रूप में सहयोगी भी मिल गया है। मंगलवार को अस्पताल में इन बच्चों का नि:शुल्क परीक्षण किया गया। सभी 17 बच्चों के ऑपरेशन के लिए साढ़े चौदह लाख रुपए का बजट बनाया गया है जिसे राज्य सरकार को भेजा जा रहा है।
पिछले दिनों खालवा में कुपोषण के कारण बच्चों की मौत के बाद जिला प्रशासन सतर्क हुआ था। उसने 30 सितंबर को चाचा नेहरू अस्पताल में शिविर लगाकर उन बच्चों को चुना जिनकी हेल्थ ग्रोथ रुक गई है।
इसमें भी सबसे गंभीर उन 17 बच्चों से इलाज की शुरुआत की गई जिनके दिल में छेद या अन्य कोई परेशानी है। एक से लेकर चार वर्ष के इन बच्चों का उपचार से पूर्व डॉ. जगदीश खांडेयार, डॉ. चिराग दोषी, डॉ. नीलेश मारू ने परीक्षण किया।
डॉ. सी.एस. अग्रवाल ने हृदय का इको कलर डापलर किया जिससे दिल के अंदर की सही स्थिति पता चल सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शरद पंडित ने बताया पिछले दिनों कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने बैठक ली थी जिसमें बच्चों के इलाज से संबंधित बातों पर चर्चा की गई। इसमें दिल की बीमारी से पीड़ित बच्चों के नि:शुल्क परीक्षण के लिए सीएचएल अपोलो अस्पताल के डायरेक्टर राजेश जैन ने प्रस्ताव रखा।
किसी के पास नहीं है बीपीएल कार्ड
इलाज के लिए जिन 17 बच्चों का परीक्षण किया गया उनमें से किसी के पास भी बीपीएल कार्ड नहीं है। नोडल अधिकारी दिलीप जैन ने बताया यदि इन लोगों के पास कार्ड होते तो इलाज में परेशानी नहीं आती।
एक मां बोली- भगवान ने मेरी आवाज सुन ली
नेहरू वनग्राम निवासी रिंकी का कहना है मेरी डेढ़ वर्ष की बच्ची पूजा के लिए ही मैं प्रतिदिन पूजन करती हूं। लगता है मेरी आवाज भगवान ने सुन ली जिससे सरकार ने इलाज के लिए प्रयास शुरू किए।
ग्राम बिस्नावदा से आए राकेश अष्ताया का कहना था मेरी तीन वर्षीय बेटी शिवानी के बारे में मैं सोच-सोचकर दु:खी होता था। निजी अस्पताल में इलाज काफी महंगा है और बीपीएल कार्ड बनते नहीं। सरकार यदि मदद नहीं करेगी तो हम जैसे गरीब लोगों के बच्चों को बचाना मुश्किल ही है।