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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. शहर में लूटपाट और अपहरण के छह मामलों में क्राइम ब्रांच द्वारा गिरफ्तार किए गए तीन आरोपी मंगलवार की सुबह बाल संप्रेक्षण गृह से फरार हो गए। तीनों आरोपी संप्रेक्षण गृह के कर्मचारी को धक्का देकर चंपत हो गए। जानकारी के अनुसार तीनों युवक मल्हार की ओर बाइक पर भागे हैं। उनकी तलाश की जा रही है।
जानकारी के अनुसार पिछले दो माह में शहर में हुई लूट और अपहरण के छह मामलों मंे रविवार को क्राइम ब्रांच ने कोरबा के तीन आरोपियांे को गिरफ्तार किया था। इनमें रामनगर निवासी गोविंद सिंह राजपूत पिता रणवीर सिंह को बिलासपुर में और अग्रोहा भवन निवासी रवि मोदी उर्फ गोल्डी व एमपी नगर निवासी संजीव गोस्वामी को कोरबा में पकड़ा गया था। तीनों को कोर्ट ने रिमांड पर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया।
मंगलवार की सुबह रोज की तरह बाल संप्रेक्षण गृह में साफ-सफाई चल रही थी। वहां का चौकीदार नहाने के लिए गया था। लगभग 7:45 बजे बाल संप्रेक्षण गृह के काउंसलर ने सफाई के लिए सामने के चैनल गेट का ताला खोला। तीनों युवक शायद पहले से ही इसके इंतजार में थे। जैसे ही उसने ताला खोला, तीनांे युवक उस पर झपट पड़े। वे उसे धक्का देकर वहां से भाग निकले। काउंसलर ने शोर मचाना शुरू किया और अधीक्षक को इसकी जानकारी दी। कुछ लोगों को युवकों के पीछे भेजा भी गया, पर तब तक युवक नजरों से ओझल हो चुके थे।
काउंसलर के अनुसार तीनांे युवक नूतन चौक से सरकंडा थाने की ओर भागे थे। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। आला अफसरांे को जानकारी मिलने पर उन्होंने पुलिस की टीम संभावित ठिकानों की ओर रवाना की। इस बीच सूचना मिली कि तीनों युवक हीरो होंडा सीबीजेड मोटर साइकिल मंे मल्हार के पास जोंधरा मोड़ में देखे गए हैं। पुलिस टीम को वहां के लिए रवाना किया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
दयालबंद से चुराई बाइक
दयालबंद निवासी वीरेंद्र कुमार पिता आरएस कुमार (24) ने मंगलवार सुबह अपनी हीरो होंडा सीबीजेड स्टार क्रमांक सीजी 10, बीसी 4427 भातखंडे संगीत महाविद्यालय के पास खड़ी की थी। सुबह लगभग 9 बजे उसकी बाइक अज्ञात चोरों ने पार कर दी। उसने घटना की सूचना सिटी कोतवाली थाने में दी और रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में बाल संप्रेक्षण गृह से फरार आरोपियों को मल्हार के पास इसी बाइक में देखा गया। पुलिस ने उनके खिलाफ धारा 379 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है।
क्षमता से डेढ़ गुना अधिक बंदी
बाल संप्रेक्षण गृह में बंदियों की संख्या इसकी क्षमता से डेढ़ गुना से भी अधिक है। जानकारी के अनुसार बाल संप्रेक्षण गृह में इस समय विभिन्न मामलों के आरोपी 82 बच्चे बंद हैं, जबकि यहां की क्षमता केवल 50 बंदियों की है। आरोपियांे के बताए अनुसार पुलिस उनकी उम्र लिख लेती है। कई बार आरोपी इसका बेजा लाभ उठाते हैं। बाल संप्रेक्षण गृह में इस समय कई ऐसे बंदी भी मौजूद है, जिनकी वास्तविक उम्र 18 वर्ष से अधिक हो सकती है। ऐसे आरोपी अपने से कम उम्र के आरोपियांे पर रौब जमाकर उनसे अपना काम करवाते हैं।