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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. तखतपुर ब्लाक में दो चरणों में करीब 43 शिक्षाकर्मियों को फर्जी नियुक्ति देने के मामले में जांच पूरी कर ली गई है। फर्जी नियुक्ति में ऐसे उम्मीदवारों को लाभ दिया गया था, जिनका नाम प्रतीक्षा सूची में ही नहीं था।
जिला पंचायत प्रशासन ने मामले की जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है, वहीं कलेक्टर ने इस मामले में अंतिम निर्णय के लिए कमिoAर से मार्गदर्शन मांगा है।
तखतपुर ब्लाक में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती के दौरान व्यापक गड़बड़ी की गई थी। इस संबंध में उम्मीदवारों ने अलग-अलग शिकायत प्रस्तुत कर जिला पंचायत प्रशासन से जांच की मांग की थी। जिला पंचायत प्रशासन ने शिकायत के आधार दो अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की जांच कराई। जांच के दौरान भर्ती में भारी अनियमितता की शिकायत सही पाई गई। जांच रिपोर्ट के अनुसार तखतपुर ब्लाक के तत्कालीन सीईओ आरएस नायक के कार्यकाल में 21 ऐसे उम्मीदवारों को चयन सूची में शामिल कर नियुक्ति दे दी गई, जिनका प्रतीक्षा सूची में नाम ही नहीं था।
श्री नायक के स्थानांतरित होने के बाद तखतपुर सीईओ के प्रभार में आए सीईओ पंकज देव द्वारा भी बगैर प्रतीक्षा सूची वाले 23 उम्मीदवारों को शिक्षाकर्मी बना देने की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक गड़बड़ी में तखतपुर बीईओ रजनीश तिवारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जिला पंचायत प्रशासन ने सारे मामलों की जांच रिपोर्ट तैयार कर फाइल अगली कार्रवाई के लिए कलेक्टर को सौंप दी है। इसी तरह कलेक्टर ने अंतिम निर्णय के लिए कमिoAर से मार्गदर्शन मांगा है। जानकारों के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले 43 शिक्षाकर्मियों की नौकरी जा सकती है। इसके साथ ही उम्मीदवारों को गलत तरीके से नौकरी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
जिला पंचायत स्तर पर जांच पूरी कर तैयार की गई रिपोर्ट अंतिम निर्णय के लिए कमिoAर को भेजी गई है। रिपोर्ट में फिलहाल 43 शिक्षाकर्मियों को फर्जी तरीके से नियुक्ति देना पाया गया है।
—संगीता पी, सीईओ जिला पंचायत