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एक साथ उठी छह अर्थियां

श्रीडूंगरगढ़. accident सोमवार रात सुजानगढ़ तहसील के पर्वतसर गांव के पास हुए हादसे में गांव के छह घरों के चिराग बुझ गए। राणासर गांव में मंगलवार को हर किसी की आंख में आंसू थे। गांव से छह अर्थियां एक साथ उठने से पूरे गांव में मातम छा गया। गांव के बुजुर्ग सदमंे मे है व औरतों, बच्चों में खौफ व्याप्त है। मृतकों के परिवारों को संभालना मुश्किल हो रहा है। मृतकों में से तीन के परिवार तो ऐसे है जिनमें अब कोई संभालने वाला नहीं रहा।

इनके सामने अब भविष्य क ी चिंता व जीवनयापन का सवाल खड़ा हो गया है। गांव के बुजुर्गाे का कहना है की उमर बीत गी पण काÝ की इसी कड़ी मार म्हारै गांव में कदै कोनी आई। हादसे में छह राणासर व एक सोनियासर के व्यक्ति की मौत से न केवल गांव बल्कि पूरी तहसील सकते में है। ग्रामीण इस हादसे के लिए भगवान को कोस रहे है। वहीं गंभीर रूप से घायल जयपुर अस्पताल में कोमा में पड़े किशोरसिंह के लिए भगवान से प्रार्थना भी कर रहे हैं। हादसे में गांव के मुखिया भैरुंसिंह राठौड़ की मौत के बाद ग्रामीण खुद को अकेला महसूस कर रहे है।

राठौड़ की विधवा कैलाश कंवर अपने सुहाग के उजड़ जाने के बाद कोमा में गए अपने बड़े बेटे किशोर सिंह को नहीं खोना चाहती। भैरुंसिंह के बच्चों की शादी कैसे होगी। यह सवाल जेहन में आते ही कै लाश कंवर दहाड़े मार कर रो पड़ती है। यही हाल भैरुं¨सह के भाई रामकुमार सिंह के घर का था। रामकुमार सिंह की पत्नी कमला कंवर अपने छोटे-छोटे तीन बच्चों को छाती से लगा कर अपने आंसू रोक नहीं पा रही है।

हालत तो बदतर मृतक किशनाराम ढोली के घर के भी है। करीब ३२ वर्षीय गरीब किशनाराम कम उमर में ही अपने पत्नी बच्चों को छोड़ गए। किशनाराम की पत्नी बसंती बिलख-बिलख कर रोते हुए अपनी लड़कियों के विवाह व इकलौते बेटे की परवरिश के सवाल किशनाराम की मृत देह से पूछ रही थी। किशनाराम के १२ वर्षीय बेटे दिलीप को समझाना ही मुश्किल हो रहा था। मृतक मुनसिंह, विजयसिंह व चुन्नीलाल के घर भी मातम पसरा हुआ रहा।

प्रशासन रहा उदासीन
गावं से छह अर्थियों के उठने से राणासर के साथ-साथ पूरी तहसील भले ही गमजदा हो गई लेकिन प्रशासन की भूमिका नगण्य ही रही। गांव में मंगलवार को एक भी प्रशासनिक अधिकारी व पुलिस कर्मचारी नहीं पहुंचा। बुरी तरह टूट चुके ग्रामीणों को भी यह बात अखरी। ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन को मरने वाले गरीब लोगों के लिए कुछ नहीं करना था तो नहीं करते परंतु मानवता के नाते एक बार आ कर ढांढ़स बंधाने का काम तो कर ही सकते थे। हालत यह थी कि मृतकों के परिजन बार-बार बेहोश हो रहे थे व होश आने पर अनियंत्रित हो रहे थे। उन्हें संभालने के लिए कोई डॉक्टर तक गांव में नहीं पंहुचा। प्रशासन द्वारा इस घड़ी में की गई गांव की उपेक्षा की निदां ग्रामीणों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों ने भी की है।

जागरण में आशीर्वाद लेने गए थे
भैरुंसिंह की रिश्तेदारी में नवरात्रा के जागरण होने के कारण सभी लोग सुजानगढ़ तहसील के पर्वतसर गांव जा रहे थे। जागरण में भैंरुंसिंह का साथ देने के लिए गांव से उसके परिवारजन किशोरसिंह, रामकुमार सिंह, मुनसिंह, विजयसिंह व गांव के किशनाराम, चुन्नीलाल भी गए थे। जागरण में अपना हुनर दिखाने सोनियासर का हंसराज भाट भी साथ गया था। सीकर सुजानगढ़ रोड से गांव की ओर मोड़ते हुए ये हादसा हो गया। किशोर सिंह को छोड़ कर सभी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया व किशोरसिंह गंभीर रूप से घायल हो गया जो जयपुर अस्पताल में जिंदगी के लिए मौत से जूझ रहा है।

सन्नाटा छाया रहा
करीब १क्क् घरों की आबादी वाले जाखासर पंचायत के छोटे से गांव राणासर हंसावतान में कभी किसी की सात भेड़ भी मर जाए तो पूरा गांव दुख में शामिल होता है। परंतु सोमवार रात हुए हादसे के बाद तो जैसे पूरे गांव को ही सांप सूंघ गया है। गांव में चल रही रामलीला बंद कर दी गई। त्यौहारों के मौसम में भी सभी हंसना भूल गए। गांव में एक भी दुकान नहीं खुली व पुरा गांव मृतकों के घरों पर जमा हो गया।

जैसे ही शव गांव में आए एक बारगी तो पूरा गांव शोक में डूब गया। अधिकांश लोग तो जड़ता की स्थिति में पहुंच गए। परिवारजनों को ढांढ़स बंधाने वाले पड़ोसी व परिचित भी टूट गए व फू ट-फूट कर रोने लगे। आस-पास के गांवों राणासर नरूकान, जाखासर पुराना, जाखासर नया आदि के लोगों ने अंतिम संस्कार की हिम्मत बंधाई। सरपंच पति व सरपंच पुत्र की अगुवाई में सारी व्यवस्थाएं कर अंतिम संस्कार किया गया।





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