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वायु प्रदूषण से अजन्मे बच्चे के फेफड़े को भी खतरा

मेलबॉर्न. वायु प्रदूषण के कारण अजन्मे बच्चों का भी फेफड़ा खराब हो सकता है। स्विट्जरलैंड के नवजात बच्चों पर किए गए अध्ययन में पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाएं जितनी ज्यादा प्रदूषित वायु के संपर्क में रहती हैं, उनके शिशु में सांस संबंधी बीमारी का खतरा उतना ही ज्यादा हो सकता है।

पहले के अध्ययनों में ऐसा सिर्फ स्कूली बच्चों में होने की बात कही गई थी। एएपी द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, गर्भावस्था में प्रदूषित वायु के संपर्क आने वाले शिशु तेजी से सांस लेते हैं। इससे वातावरण में मौजूद खतरनाक तत्व उनके फेफड़े में पहुंच जाते हैं। यह अध्ययन बर्न यूनिवर्सिटी के श्वसन विशेषज्ञों ने किया है।

बर्लिन में यूरोपियन रेस्पिरेट्री सोसायटी कांग्रेस के दौरान इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता फिलिप लाटजिन ने बताया कि मुख्य मार्गो के 150 मीटर के दायरे में रहने वाले शिशुओं को इस बीमारी का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यह अध्ययन 241 बच्चों पर किया गया। इसमें पर्यावरण मित्र शहरों की योजना बनाने की जरूरत पर बल दिया गया है।

यह एक कड़वा सच है। इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है कि हम अपने शहरों के निर्माण किस तरीके से कर रहे हैं।’

- पीटर स्लाई, निदेशक, कॉलेबॉरेटिंग सेंटर फॉर रिसर्च ऑन चिल्ड्रेंस एन्वायरमेंटल हेल्थ, पर्थ (डब्ल्यूएचओ के अतंर्गत)





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