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जापान के एक और अमेरिका के दो वैज्ञानिकों को वर्ष 2008 के लिए रसायन शास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने जापान के ओसामु शिमोमुरा और अमेरिका के मार्टिन शेल्फे व रॉजर सिएन को ग्रीन फ्लुरोसेंट प्रोटीन (जीएफपी) की खोज और विकास के लिए यह पुरस्कार देने की घोषणा की है।
जीएफपी सबसे पहले जेलीफिश में देखा गया था। यह प्रोटीन प्रयोगशाला में जीवधारियों में मस्तिष्क कोशिकाओं के विकास या कैंसर कोशिकाओं को फैलाने जैसी जैविक क्रिया का खुलासा करने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
ऐसे हुई खोज :
जापान के शिमोमुरा ने उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी समुद्र तट पर मिली जेलीफिश से जीएफपी को अलग करने के बाद पाया कि यह पराबैंगनी रोशनी में चमकीला हरा दिखाई देता है।
90 के दशक में शेल्फे ने चमकीले अनुवांशिक तत्व के रूप में जीएफपी का महत्व बताया, जबकि सिएन ने जीएफपी के प्रदीप्त होने के बारे में जानकारी बढ़ाने में योगदान दिया।
इस खोज से वैज्ञानिकों को कई जैविक प्रक्रियाओं को समझने में जानकारी मिली है।
अल्जाइमर के इलाज में उपयोगी: शोधकर्ता जीएफपी का उपयोग अल्जाइमर की बीमारी में तंत्रिका कोशिकाओं को हुई क्षति का जायजा लेने या विकसित होते भ्रूण के पेनक्रियाज के बीटा सेल्स में इंसुलिन के बनने की जानकारी लेने में कर सकेंगे।