इंदौर. दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में बम की धमकी भरे ई-मेल की जांच साइबर कैफे के रिकॉर्ड रजिस्टर में कटे मिले एक नाम पर आकर अटक गई है। पुलिस चार अन्य लोगों में तीन से तो पूछताछ कर चुकी है, जिसमें कुछ नहीं निकला। चौथा व्यक्ति शुजालपुर में है जिसे इंदौर बुलाया गया है।
साइबर कैफे के रिकॉर्ड रजिस्टर से ई-मेल भेजे जाने की समयावधि में पांच लोग कैफे में मौजूद होने का पता चला। डीएसपी क्राइम राजेश व्यास के मुताबिक इनमें कनिष्क जैन निवासी विवेकानंदनगर स्वाती जैन एकेडमी से बीबीए का कोर्स कर रहा है। कनिष्क के पास रहने वाला अनिल शर्मा एसडी बंसल कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहा है। उसी कॉलोनी में रहने वाले प्लावन कुमार यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनजर हैं तथा चौथा व्यक्ति आलोक कुमार मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है जो शुजालपुर में है। पुलिस ने उसे इंदौर बुलाया है। पांचवे व्यक्ति का नाम रजिस्टर में से काटा गया है।
पांचवे व्यक्ति की तलाश
पांचवे व्यक्ति का सुराग लगाने के लिए पुलिस साइबर कैफे मालिक दिलीप उपाध्याय से लगातार पूछताछ कर रही है। उसने बताया कि नाम तो याद से लिखा था पर काटा किसने यह पता नहीं चला। उसे शक्ल भी याद नहीं आ रही है। दिलीप के पिता प्रभुदयाल भी कभी-कभार साइबर कैफे पर बैठते थे, लेकिन कुछ पता नहीं चला।
लापरवाही पड़ी भारी
ई-मेल दिलीप के साइबर कैफे से किसी अन्य व्यक्ति ने किया लेकिन पुलिस के चंगुल में फंसा दिलीप ही। जानकारों के मुताबिक इसके लिए दिलीप की लापरवाही जिम्मेदार है। इससे पहले इंदौर में ई-मेल से धमकी भेजे जाने के बहुत से प्रकरण हो चुके हैं। उनके बाद पुलिस ने साइबर कैफे वालों के लिए सर्फिग करने वालों का नाम-पता तथा फोन नंबर नोट करने के निर्देश दिए थे।
अफवाह किसने फैलाई इसकी तह तक पहुंचने के लिए भास्कर ने उन दो लोगों से बात की जो ई-मेल करने की अवधि में उस साइबर कैफे में मौजूद थे
कनिष्क तो कैफे गया ही नहीं..
बीबीए के स्टूडेंट्स कनिष्क जैन नाम रजिस्टर में कैसे आया यह भी एक रहस्य है क्योंकि कनिष्क ने उस दिन सायबर कैफे जाने की बात से साफ इनकार किया है। पुलिस की पूछताछ में अनिल शर्मा और सायबर कैफे संचालक ने भी इस बात की पुष्टि की है। कनिष्क का कहना है कि पुलिस उन्हें नाहक परेशान कर रही है।
मैं सिर्फ पांच मिनट रुका - अनिल
कम्प्यूटर इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहे अनिल शर्मा से पुलिस ने कई सवाल किए हैं। उसके मोबाइल पर भेजे गए संदेशों की भी पड़ताल की जा रही है। अनिल का कहना है कि वह केवल पांच मिनट सायबर कैफे में रुका था और संचालक ने उससे पैसे भी नहीं लिए थे। उस दिन पेन ड्राइव साथ में नहीं होने के कारण वह वापस आ गया था। कैफे में केबिन बने होने के कारण उसे किसी का चेहरा ध्यान नहीं है। अनिल ने बताया बुधवार को अनिल का पेपर था जिसे वह ठीक से हल नहीं कर पाया।
साइबर कैफे का पंजीयन पुलिस वेबसाइट पर कराएं
इंदौर. डीपीएस को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल के बाद प्रशासन तथा पुलिस ने साइबर कैफे संचालकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब सभी के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत साइबर कैफे वालों को कैफे का पंजीयन पुलिस की वेबसाइट पर कराना होगा। लापरवाही बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम रमेश भंडारी ने इस संबंध में धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए सभी साइबर कैफे संचालकों को तत्काल प्रभाव से अपना पंजीयन पुलिस की वेबसाइट www.cybercafecontrol.com पर कराना होगा। इसके साथ ही सभी को ग्राहकों की प्रविष्टि के लिए एक रजिस्टर रखना होगा। उसमें ग्राहक का नाम, पता, टेलीफोन-मोबाइल नंबर आदि का विवरण रखना होगा। इसके अलावा ग्राहक के आने-जाने का समय व दिनांक भी दर्ज करनी होगी।
सर्फिग की अनुमति परिचय पत्र, एटीएम कार्ड, टेलीफोन बिल, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य किसी एड्रेस व फोटो आईडी प्रूफ के बाद ही दें। अगर कोई ग्राहक शहर से बाहर का है तो उसके इंदौर में परिचित का पूरा विवरण दर्ज किया जाए। किसी को भी बिना फोटो आईडी प्रूफ दिखाए इंटरनेशनल कॉल न लगाने दिए जाएं। स्थाई ग्राहकों के फोटो भी रजिस्टर में लगाए जाएं।
सर्फिग करने वालों का फोटो रिकॉर्ड वेब कैमरे से भी रखें जिसे कम से कम दो माह तक सुरक्षित रखा जाए। इंटरनेट प्रदान करने वाली कंपनियां बीएसएनएल, रिलायंस, टाटा, एयरटेल आदि किसी भी साइबर कैफे को नया व पुराना कनेक्शन या अतिरिक्त कनेक्शन देने की जानकारी व आईपी एड्रेस की जानकारी प्रशासन को दें। प्रत्येक दो माह में इसे अपडेट भी करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों में कार्रवाई होगी। यह आदेश 7 दिसंबर 2008 तक प्रभावी रहेंगे।